झालावाड़: सार्वजनिक निर्माण विभाग में करोड़ों का कथित घोटाला, जांच के घेरे में अफसर
झालावाड़ जिले में सड़क पटरी सफाई और मरम्मत के नाम पर सरकारी बजट के दुरुपयोग का आरोप है, जिसमें नरेगा भुगतान और निजी फर्मों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

झालावाड़ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा हाल ही में कराए गए सड़क मरम्मत कार्य और पेचवर्क की स्थिति, जहां गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
झालावाड़। जिले में कांग्रेस शासन के दौरान एक रहस्यमय तरीके से करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है, घोटाला भी ऐसा जो कोई सोच भी नहीं सकता। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के एक तत्कालीन मंत्री की पनाह में यह घोटाला आयोजित हुआ है। घोटाला प्रमाणित है इसलिए साक्ष्य मायने नहीं रखते, सरकारी दस्तावेज ही चीख-चीख कर कह रहे हैं कि भ्रष्टाचारी करोड़ों का खेल खेलने में बिना किसी भनक के सफल हो गए। इस खेल में अफसर भी शामिल हैं जो दूध के धुले बनकर ईमानदार होने के प्रमाणपत्र बांटते रहते हैं, लेकिन अब तो भांडा फूट गया। बड़ी जिम्मेदारी से कहना पड़ रहा है कि भाजपा-कांग्रेस में गठबंधन नहीं होता तो जनता के रुपये ठेकेदार के जरिए किस-किस की जेब में गए हैं, यह ढाई साल के शासन में उजागर हो जाता।
पटरी सफाई और मरम्मत के नाम पर लाखों का खेल
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार मामला सार्वजनिक निर्माण विभाग का है। स्टेट हाईवे व ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें हों, सड़कों के दोनों ओर पटरी सफाई मरम्मत कार्य के नाम पर बड़े-बड़े टेंडर होते हैं। जो कार्य बहुत कम पैसे में किए जा सकते हैं, वो लाखों रुपए में होते हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि यह कार्य होता ही नहीं, स्टेट हाईवे पर ज़रूर थोड़ा-बहुत होता है।
नरेगा और फर्म के जरिए भुगतान का संदिग्ध जाल
ग्राम पंचायतों की नरेगा की ऑनलाइन सिस्टम में जाएं तो पिड़ावा, सुनेल व अन्य पंचायत समिति की साइट को देखें तो रायपुर की एक फर्म के माध्यम से नरेगा योजना में पटरी सफाई मरम्मत कार्य के नाम से भुगतान मिलेगा, वो भी लाखों रुपए का। स्वाभाविक रूप से नरेगा के श्रमिकों को दिया गया भुगतान हो सकता है, लेकिन कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग का है तो लाखों का भुगतान फर्म को हुआ होगा। फिर एक फर्म को कार्य व भुगतान सवाल पैदा करता है। पंचायत समिति झालरापाटन की खानपुरिया में लाखों रुपए का कार्य इसी फर्म को दिया गया है। "कार्य की जांच हो तो मामला चौपट होकर जनता के सामने आएगा।"
कद्दावर नेताओं की राजनीतिक जुगलबंदी और जनता का नुकसान
जनता की निगाह में हाड़ौती के दोनों कद्दावर नेता आपस में बहुत बड़े प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं, लेकिन यह दिखाने की राजनीति है, वरना जनता और राजस्व की राशि के बारे में सोचा जाता तो मामला खुलकर सामने आ जाता। अब देखना यह है कि झालावाड़ भाजपा के नेता इस करोड़ों रुपए के घोटाले को खोलकर राजनीति विरोधी दल के नेता को नंगा कर जनहित में क्या कदम उठाते हैं।
गुणवत्ताहीन निर्माण और अफसरों की खामोशी
गौरतलब है कि पूर्व में भी कोटा ब्यूरो ने समाचार प्रकाशित कर पटरी सफाई मरम्मत कार्य में माधोपुर तिराहे से फोरलेन पुलिया तक (तीन किलोमीटर के) लाखों रुपए का बजट पास किया था, जिसके समाचार प्रकाशित करने के पश्चात सार्वजनिक निर्माण विभाग ने कार्य पर रोक लगा दी थी। लेकिन कार्य बाद में हुआ और चुपचाप हुआ। इसके और अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए माधोपुर रोड पर गुणवत्तापूर्ण बनी सड़क को तोड़कर नई सड़क बनाई गई, जो पहली बरसात में जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो गई थी। "जिस पर ठेकेदार द्वारा गड्ढों को भरकर खानापूर्ति कर दी गई, लेकिन विभाग द्वारा घटिया निर्माण पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।" सड़क पर हुए पेचवर्क आज भी भ्रष्टाचार की कहानी कह रहे हैं।

Pratahkal Bureau
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