झालावाड़। राज्य सरकार की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में निशुल्क जांच और उपचार कार्यक्रम चलाए जाते हैं। लेकिन जिले में हाल ही में सामने आई गंभीर जानकारी से स्पष्ट होता है कि कुछ निजी अस्पताल इन सरकारी सुविधाओं का गलत लाभ उठाकर लोगों को आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों रूप से हानि पहुँचा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, झालावाड़ चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी अस्पतालों और झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होने के बावजूद, कुछ मरीज नीजी नर्सिंग होमों में भर्ती किए जा रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकारी तंत्र में व्यवस्था कमजोर है, जिससे मरीजों को नीजी अस्पतालों की ओर मजबूर होना पड़ रहा है।

एक स्थानीय उदाहरण में, हाल ही में वर्तमान मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री-मंत्री के प्रवास के दौरान, एक प्रभावशाली व्यक्ति के स्वामित्व वाले निजी अस्पताल द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए गए। ये शिविर सरकारी भवनों में आयोजित किए गए और ostensibly सेवा के बजाय व्यवसायिक उद्देश्य से संचालित किए जा रहे थे। कई ग्रामीणों को जांच और कुछ दवाएं निशुल्क दी गई, लेकिन कुछ लोगों को बिमार बताकर अनावश्यक रूप से नीजी अस्पतालों में भर्ती कर दिया गया।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, झालरापाटन शहर से लगभग तीन किलोमीटर दूर एक गांव में सात से आठ ग्रामीणों को बिमारी नहीं होने के बावजूद बिमार बताकर सात दिन तक भर्ती किया गया। इसमें एक ग्रामीण से प्रतिदिन 7200 रुपये का इलाज़ खर्च दिखाकर सरकारी योजना के तहत भुगतान उठाया गया।

विशेषज्ञों और सूत्रों का कहना है कि ऐसे मामलों में उच्च स्तरीय शासन और प्रशासन की संलिप्तता होने की भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। जिले के कई बड़े निजी अस्पताल, जैसे आयुष्मान, सरदार पटेल, और ट्रॉमा सेंटर ने भी सरकारी योजनाओं के तहत मरीजों को आपरेशन और इलाज के नाम पर करोड़ों रुपए वसूले हैं।

अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक जांच नहीं हुई है। हालांकि, यदि कोई स्वतंत्र और ईमानदार संस्था मामले की पड़ताल करती है, तो स्वास्थ्य विभाग और संबंधित मंत्री भी इस खेल से बच नहीं पाएंगे।

यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को उजागर करता है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Suresh Momiya, Jhalawar

Suresh Momiya, Jhalawar

नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)

वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय


परिचय

सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव 

पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • दैनिक बढ़ता राजस्थान
  • दैनिक कोटा ब्यूरो
  • दैनिक दो गज दूरी

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

Next Story