झालावाड़ के राजनीतिक परिदृश्य में इन दिनों सत्ता और संगठन के भीतर का अंतर्विरोध चर्चा का विषय बना हुआ है। जिले की राजनीतिक संरचना में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है, जहाँ वर्षों से सक्रिय और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ऐसे चेहरों को प्रमुखता दी जा रही है, जिनका कोई ठोस राजनीतिक आधार या जनाधार नहीं है। इस स्थिति ने संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहाँ कर्मठ कार्यकर्ताओं के स्थान पर नव-नियुक्त चेहरों का दबदबा बढ़ता जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बिना किसी चुनावी परीक्षा के पदों पर काबिज हुए ये चेहरे संगठन के भविष्य और निर्णय लेने की प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। आलोचकों का तर्क है कि लोकतंत्र में नेतृत्व का आधार जनमत और जमीनी संघर्ष होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में 'पद सुनिश्चित करने' की प्राथमिकता ने जमीनी कार्यकर्ताओं को हाशिए पर धकेल दिया है। संगठन के भीतर पनप रही इस संस्कृति को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है। यदि कोई कार्यकर्ता संगठन के हित में सवाल उठाता है या भ्रष्टाचार के मामलों पर अपनी बात रखता है, तो उसे अनुशासनहीनता या विरोधी खेमे से जुड़े होने का आरोप झेलना पड़ता है।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी जिले में गहरी चिंता व्याप्त है। फाइलों और रिपोर्टों में विकास की जो तस्वीर पेश की जा रही है, धरातल पर आम आदमी की स्थिति उससे भिन्न नजर आती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि संगठन दरबार में तब्दील हो जाए और वहाँ केवल प्रशंसा की गुंजाइश रहे, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। स्थिति यह है कि जनता के बीच रहे कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है और ऐसे लोग कमान संभाले हुए हैं जिनका स्थानीय समस्याओं से सीधा सरोकार कम दिखाई देता है।

झालावाड़ की जनता इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए है। इतिहास गवाह है कि राजनीतिक नेतृत्व शोर के दम पर नहीं, बल्कि धरातल पर किए गए कार्यों और जनसेवा से स्थापित होता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम निर्णय का अधिकार जनता के पास सुरक्षित है। यह स्पष्ट है कि जब चुनावी समय आएगा, तो जनता केवल कागजी दावों को नहीं, बल्कि उस ईमानदारी और संघर्ष को परखेगी जिसने उनके सुख-दुख में साथ दिया है। लोकतंत्र की खूबी यही है कि वह समय आने पर प्रत्येक चेहरे को उसकी सही पहचान और ऊंचाई का एहसास करा देता है।

Suresh Momiya, Jhalawar

Suresh Momiya, Jhalawar

नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)

वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय


परिचय

सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव 

पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • दैनिक बढ़ता राजस्थान
  • दैनिक कोटा ब्यूरो
  • दैनिक दो गज दूरी

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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