झालावाड़ की सियासत में इन दिनों विकास के मुद्दे पर सवाल और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज होता दिखाई दे रहा है। चार पंचायत समितियों, जिला परिषद और सरपंचों के आसन्न चुनावों ने जिले का सियासी पारा चढ़ा दिया है। चुनाव में किसके सिर जीत का ताज सजेगा और कौन विजयमाला पहनेगा, इसका फैसला जनता करेगी, लेकिन चुनावी मुकाबले से पहले ही राजनीतिक समीकरणों और नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

वसुंधरा राजे के राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले झालावाड़ में चुनावी जीत के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि जीत के मामूली अंतर को भी विकास की उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है। विकास कार्यों की स्थिति पर सवालों के बीच नेताओं के सम्मान समारोह और माल्यार्पण को लेकर भी राजनीतिक कटाक्ष किए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि विकास की वास्तविक स्थिति से ज्यादा जोर राजनीतिक उपलब्धियों के प्रदर्शन पर दिया जा रहा है।

जिले की भाजपा राजनीति में नेतृत्व को लेकर भी असंतोष की चर्चा है। स्थानीय भाजपाइयों के बीच लोकप्रिय नेता स्वर्गीय श्री कृष्ण पाटीदार के बाद संगठन की कमान दो खास चेहरों को सौंपे जाने पर सवाल उठने की बात कही जा रही है। आरोप है कि मैडम का इन नेताओं पर अटूट विश्वास पार्टी के भीतर असहजता पैदा कर रहा है और संगठनात्मक मजबूती प्रभावित हो रही है। पार्टी के राजनीतिक गढ़ को भीतर से कमजोर करने की आशंका भी इसी संदर्भ में जताई जा रही है।

विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जहां जीत का अंतर छह-छह हजार वोटों का हुआ करता था, वहीं हालिया चुनावी समीकरणों ने राजनीतिक हलकों में चिंता बढ़ाई है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को मिले कुल वोटों के मुकाबले भाजपा को कम वोट मिलने का दावा करते हुए इसे बदलते जनमत का संकेत बताया जा रहा है। विकास के मुद्दे पर उठते सवालों के बीच भ्रष्टाचार के आरोप और सांसद-विधायक की खामोशी भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। आलोचकों का कहना है कि जिले में विकास को लेकर ठोस चर्चा के बजाय भ्रष्टाचार के आरोपों ने प्रमुखता हासिल कर ली है।

जिला स्तर पर निकाय में कांग्रेस का बोर्ड बनना भी जिले की राजनीति का अहम घटनाक्रम रहा। इसे असाधारण परिणाम बताते हुए आरोप लगाया जा रहा है कि सत्तापक्ष ने झालावाड़ में साम, दाम, दंड और भेद के सभी तरीके आजमाए, फिर भी कांग्रेस बोर्ड बनाने में सफल रही। कांग्रेस के पास नेतृत्व के स्तर पर कोई खास प्रभावी रणनीति नहीं होने की बात कहे जाने के बावजूद भाजपा खेमे के अति-आत्मविश्वास और कथित भ्रष्ट नेताओं को महत्वपूर्ण पद सौंपने की प्रवृत्ति को कांग्रेस के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सांसद दुष्यंत सिंह के प्रति जनता की व्यक्तिगत नाराजगी नहीं होने का दावा करते हुए असंतोष का कारण स्थानीय नेतृत्व और व्यवस्था को बताया जा रहा है। आरोप है कि चाटुकारिता के आधार पर प्रभावशाली पद ऐसे लोगों को सौंपे गए हैं, जिन पर माफिया से जुड़े होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल आगामी पंचायत चुनावों और जिला प्रमुख के चुनाव में भाजपा के लिए चुनौती बन सकते हैं।

झालावाड़ में चार पंचायत समितियों, जिला परिषद और सरपंचों के आसन्न चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक दलों की रणनीति और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। एक ओर भाजपा के सामने अपने राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक स्थिति को बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर कांग्रेस को ग्रामीण क्षेत्रों में उभरते असंतोष से लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। विकास और भ्रष्टाचार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनावी नतीजे ही तय करेंगे कि जनता का रुझान किस ओर है और जिले की सियासत में किसे बढ़त मिलती है।

Suresh Momiya, Jhalawar

Suresh Momiya, Jhalawar

नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)

वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय


परिचय

सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव 

पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • दैनिक बढ़ता राजस्थान
  • दैनिक कोटा ब्यूरो
  • दैनिक दो गज दूरी

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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