झालावाड़: पुलिस कस्टडी में अनिल की मौत, प्रमोद शर्मा ने एसपी को ठहराया जिम्मेदार
युगान्तर संस्थान के अध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने प्रेस वार्ता कर झालावाड़ पुलिस पर प्रताड़ना के आरोप लगाए और एसपी सहित अन्य कर्मियों को हटाने की मांग की।

झालावाड़ में प्रेस वार्ता के दौरान युगान्तर संस्थान के अध्यक्ष प्रमोद शर्मा पुलिस कस्टडी में हुई अनिल की मौत के मामले में दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए।
झालावाड़, 05 फरवरी गुरूवार से युगान्तर संस्थान के अध्यक्ष जो पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रहे प्रमोद शर्मा ने अपने निजी कार्यालय में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए, पुलिस कस्टेडी में अनिल पुत्र हजारीलाल की 28 दिसम्बर 2025 को हुई मौत का सम्पूर्ण जिम्ममेदार, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार और झालावाड़ कोतवाली में तैनात C.I. एवं पुलिस वालों को ठहराया है।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि और गलत गिरफ्तारी
शर्मा ने इस हत्या का खुलासा करते हुए कहा कि:
- "18 दिसम्बर 2025 को जैल रोड़ I.T.I. के पीछे बनी कच्ची बस्ती में एक झगड़ा सोनू, अरबाज और अफरोज के बीच होता है, जिसमें सोनू व अरबाज, अफरोज को चाकू से घायल कर देता है, उस समय अनिल व दुर्गेश उस स्थान से कुछ ही दूरी पर अनिल की मौसी के मकान पर खड़े थे।"
- "इस घटना के बाद अरबाज इस बात से नाराज होकर की जब अनिल मुझे जानता था फिर भी उसने जब सोनू चाकू से वार कर रहा था तो बीच बचाव नहीं करने को लेकर अरबाज इस चाकूबाजी के केस में अनिल को गलत तरीके से फंसाने की नियत से उसका नाम F.I.R. में लिखवा देता है।"
F.I.R. में नाम आने के बाद अगले दिन 19 दिसम्बर 2025 को सुबह तकरीबन 7 से 7:30 बजे स्पेशल के राजेश व कुकी बना सहित पुलिस वालों से भरी एक जीप जिसका नम्बर RJ-14 TE 8445 है वह अनिल को गिरफ्तार करने उसके घर पहुंचती है और वहां से अनिल को गिरफ्तार करके ले जाती है।
परिजनों की तलाश और अस्पताल में बदहवास अनिल
इस अचानक हुई घटना और पुलिस वालों का इस प्रकार अनिल को गिरफ्तार करने पर घर पर मौजूद अनिल की मां व उसके भाई, बहिन घबरा जाते है और पुलिस की गाड़ी के पीछे ही अनिल का भाई राहुल जाता है। राहुल कोतवाली पहुंचकर पूछता है कि उसके भाई को किस मुकदमें में पुलिस ने गिरफ्तार किया लेकिन संतोषप्रद जवाब ना मिलने की सूरत में राहुल वकील के पास जाकर सारी घटना बताता है। वकील द्वारा कोतवाली में मालूम करने पर जवाब मिलता है कि अनिल को तफ्तीश के लिए ले गये है।
इसी प्रकार शाम हो जाती है लेकिन अनिल का उसके घर वालों को पता नहीं चलता। शाम को फिर राहुल, अनिल की तलाश के लिए कोतवाली जाता है तो उससे कहा जाता है कि अनिल के टिफिन लेकर आओ। राहुल उसकी मां के साथ टिफिन लेकर कोतवाली पहुंचता है तो उसे व उसकी मां को यह कह कर भगा दिया जाता है कि अनिल यहां नहीं है, होगा अस्पताल में वही तालश करो। जब राहुल उसका एक साथी और अनिल की मां, अनिल के ढूंढते हुए अस्पताल पहुंचते है तो वहां अनिल बदहवास एक पलंग पर पड़ा हुआ मिलता है।
पुलिस कस्टडी में बर्बरता के आरोप
शर्मा ने बताया कि अगर ठीक समय अनिल को इलाज उपलब्ध हो जाता तो शायद उसकी मृत्यु नहीं होती लेकिन पुलिस वालों ने पुलिस अधीक्षक अमित कुमार और थाना अधिकारी मुकेश मीणा के संज्ञान में यह घटना डालते है और अस्पताल से चले जाते है।
बताया गया कि अनिल को गिरफ्तार करके कोतवाली लाया जाता है जहां नशे में धुत पुलिस वाले उसके शरीर पर सिगरेट लगाते है, उसके बाद अनिल को ग्रोथ सेन्टर ले जाकर वहां उसके साथ बुरी तरह से मारपीट होती है ओर इस मारपीट में उसके सर को दीवार से भड़ीका जाता है जब वह अचेत होकर नीचे गिर जाता है तो उसके शरीर को जूतों से रोंदा जाता है जिसका प्रमाण उसकी पहनी सफेद शर्ट पर जूतों के निशान इस बात की गवाही देते हैं।
"जब मारपीट जारी रहती है तभी उसके दोनो टांगों पर पत्थर डाल-डालकर तोड़ दिये जाते है। इस प्रकार अनिल के साथ पुलिस का जानवरों से भी बदतर सलूक किया जाने से वह बदहवास हो जाता है और उसकी नब्ज कमजोर पड़ने लगती है, इससे घबराकर पुलिस वाले सुबह 11 से 12 बजे के बीच में ही अनिल को अस्पताल में लावारीस की तरह पटक कर चले जाते है।"
इलाज के दौरान मृत्यु और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा
19 तारीख को झालावाड़ अस्पताल में ही अनिल के घरवालों के पहुंचने के बाद उसका इलाज शुरू होता है लेकिन उसकी हालत को देखते हुए उसे कोटा रेफर कर दिया जाता है जहां दौराने इलाज उसकी 28 दिसम्बर 2025 को उसकी मृत्यु हो जाती है।
शर्मा ने झालावाड़ अस्पताल व कोटा नवीन चिकित्सालय मेडिकल कॉलेज कोटा के तारीख का साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि अनिल के शरीर व सिर पर गम्भीर चोटें थी और इसी कारण झालावाड़ अस्पताल से लेकर कोटा इलाज के दौरान अनिल एक बार भी होश में नहीं आया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विवेचना करते हुए शर्मा ने बताया:
- प्रथम कारण: "DAI (डिफ्युज एक्सोनल इंजरी) एक गम्भीर मस्तिष्क की चोट जो सिर में अचानक कही भड़ीके जाने या झटके के कारण होती है। इसमें मस्तिष्क का तंत्रिका कोशियन्स (एक्सो का टूट या क्षतिग्रस्त) हो जाती है, जिससे मरीज अपनी चेतना खो बैठता है और उसका वापिस आना बहुत ही नामुमकिन होता है।"
- द्वितीय कारण: अनिल की दोनो टांगों का टूटना व उसके हाथों पर भी गम्भीर चोट के निशान उसकी मौत का कारण बने।
न्यायालय का आदेश और उच्च स्तरीय मांग
प्रमोद शर्मा ने पुष्ट किया कि अनिल की मौत का कारण पुलिस अधिकारी व पुलिस थाना कोतवाली झालावाड़ में तैनात पुलिस कर्मी है। इस घटना से आहत हो एक इस्तगासा दिनांक 23.01.2026 को झालावाड़ में ही माननीय न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अनिल के सगे भाई राहुल द्वारा प्रस्तुत किया गया।
दिनांक 11.02.2026 को माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा अहम आदेश पारित कर कहा कि परिवादी मय अधिवक्ता उपस्थित, कार्यालय रिपोर्ट पेश हुई, जिसका परिवाद पत्र का अवलोकन किया गया एवं अधिवक्ता परिवादी को सुना गया प्रकरण 175 (4) (क) (ख) भारतीय न्याय संहिता 2023 के प्रावधानों का अवलोकन किया गया। उक्त प्रावधानों के अन्तर्गत परिवाद पत्र पुलिस महानिरीक्षक कोटा रेंज कोटा परिवाद पत्र में वर्णित घटना के तथ्यों व परिस्थितियों को अन्तर्विष्ट करने वाली रिपोर्ट हेतु प्रेषित किया जाता है।
शर्मा ने बताया कि पत्र केन्द्रीय गृहमंत्री, गृहसचिव, मुख्यमंत्री राजस्थान, गृहसचिव राजस्थान एवं पुलिस महानिदेशक जयपुर को भी प्रेषित किया जा रहा है, जिसमें मांग की गई है कि:
- झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार को तुरन्त प्रभाव से एपीओ कर पुलिस मुख्यालय पर तैनात किया जावे।
- झालावाड़ कोतवाली के सम्पूर्ण थानाधिकारी एवं पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर लाईन हाजिर किया जावें।
"जिससे इस घटना की जांच एवं सबूतो को प्रभावित नहीं कर सके और ना ही किसी प्रकार की कागजो में भी हेरफेर कर सकें।"

Pratahkal Bureau
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