झालावाड़। राजस्थान के झालावाड़ जिले में पुलिस ने एक अत्यंत संवेदनशील और अमानवीय अंतर-राज्यीय मानव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 10 लड़कियों को सुरक्षित मुक्त कराया है। झालावाड़ पुलिस अधीक्षक श्री अमित कुमार ने प्रेस नोट जारी कर इस बड़ी कार्रवाई की जानकारी दी। यह गिरोह झालावाड़, बूंदी, टोंक से लेकर ग्वालियर और मुंबई तक फैला हुआ था, जो आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाकर नाबालिग लड़कियों को प्रलोभन देकर देह व्यापार के दलदल में धकेल रहा था।

मामले की शुरुआत तब हुई जब एक प्रकाशित खबर में मानव तस्करी के तार झालावाड़ से जुड़े होने की सूचना मिली। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने इस खबर को गंभीरता से लेते हुए अन्य पोर्टलों पर भी इसकी पड़ताल की। पीड़ित परिवारों द्वारा जांच में सहयोग न करने की स्थिति में पुलिस अधीक्षक ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महिला अनुसंधान सैल श्री श्योराजमल मीणा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर गोपनीय जांच के निर्देश दिए। जिला पुलिस के कंजर पुनर्वास कार्यक्रम में नियुक्त सहायक उपनिरीक्षक श्री मदन लाल और हेड कांस्टेबल श्री बाबूलाल ने जिले के सभी कंजर डेरों में जाकर गुप्त रूप से तथ्यों की तस्दीक की। जांच में सामने आया कि रामकन्या बाई सहित बूंदी के दबलाना के स्थानीय दलाल कंजर समाज की नाबालिग बच्चियों को आर्थिक प्रलोभन और अच्छी परवरिश का झांसा देकर ले जाते थे। इसके बाद मुंबई, नागपुर और अन्य महानगरों में सक्रिय गिरोह के दलालों को बेच दिया जाता था, जहां फर्जी दस्तावेजों के जरिए उम्र बढ़ाकर और पहचान बदलकर उन्हें डांस बारों के माध्यम से देह व्यापार में धकेला जाता था।

इस संगठित अपराध की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक झालावाड़ श्री भागचंद्र के पर्यवेक्षण और पुलिस उपाधीक्षक झालावाड़ श्री हर्षराज सिंह खरेड़ा के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। योजनाबद्ध तरीके से विभिन्न पुलिस टीमों को देश के अलग-अलग हिस्सों में रवाना किया गया। वृत्ताधिकारी पिडावा श्रीमती पूजा नागर और जिला स्पेशल टीम के प्रभारी श्री मोहनलाल की टीम ने मुंबई पुलिस के सहयोग से 04 लड़कियों को दस्तयाब कर एक आरोपी को डिटेन किया। थानाधिकारी रटलाई श्री लोकेश मीणा की टीम ने बूंदी से 01 और वृत्ताधिकारी उनियारा श्रीमती आकांक्षा कुमारी की टीम ने टोंक से 01 नाबालिग लड़की को मुक्त कराया। अब तक कुल 10 लड़कियों को सुरक्षित दस्तयाब किया जा चुका है, जिनमें से 07 नाबालिग हैं, 01 बालिग है और शेष 02 की उम्र की जांच की जा रही है।

जांच में रैकेट के तीन स्तरीय नेटवर्क का खुलासा हुआ। प्रथम स्तर पर स्थानीय एजेंट गरीब परिवारों को प्रलोभन देते हैं, द्वितीय स्तर पर दलाल परिजनों से स्टाम्प पेपर पर अंगूठा लगवाकर बच्चियों को ले जाते हैं और तृतीय स्तर पर मुंबई व अन्य शहरों के डांस बार संचालक उन्हें देह व्यापार में धकेलते हैं। गिरफ्तार आरोपियों के पास से मिले डिजिटल डिवाइस और सौदा पत्रों में अमानवीय क्रूरता सामने आई है, जिसमें उल्लेख था कि केवल लड़की की मृत्यु की स्थिति में ही उनका कर्ज माफ होगा। गिरोह की शातिराना चाल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुंबई पुलिस द्वारा रेस्क्यू की गई लड़कियों को परिजनों को सौंपने के दौरान दलाल उन्हें दोबारा कैप्चर करने की फिराक में थे, लेकिन झालावाड़ पुलिस की मुस्तैदी से मुख्य एजेंटों को राउंड अप कर लिया गया।

इस मामले में पुलिस ने रामकन्या पत्नी रमेश कंजर, भीमशंकर उर्फ भीमा, अंकुश कर्मावत, रमेश कंजर (सभी निवासी शंकरपुरा, बूंदी) और सनी (निवासी रलायती, झालावाड़) को गिरफ्तार किया है, जबकि बंटी पुत्र भोपाल कंजर को डिटेन किया गया है। मुंबई के पीटा एक्ट प्रकरण में मोहम्मद हनीफ, अनवर आलम और राजेश ढवले की गिरफ्तारी शेष है। इस सफल ऑपरेशन में एएसआई मदन लाल और हेड कांस्टेबल बाबूलाल की अदम्य साहस और गोपनीयता के साथ की गई भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। झालावाड़ पुलिस ने बूंदी, टोंक और मुंबई पुलिस के साथ साझा अभियान चलाकर इस कुकृत्य में शामिल गिरोह की कमर तोड़ दी है।

Pratahkal Newsroom

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