झालावाड़: मंदिर के पीछे चल रहे 'संगठित सट्टा साम्राज्य' का भंडाफोड़, तीन बड़े खाईवाल गिरफ्तार
झालावाड़ पुलिस की बड़ी कार्यवाही: झालरापाटन में पशुपतिनाथ मंदिर के पीछे चल रहे संगठित सट्टा गिरोह का पर्दाफाश। थानाधिकारी अल्का के नेतृत्व में तीन कुख्यात खाईवाल हरिशंकर, चेतन और नरेन्द्र गिरफ्तार। आरोपियों से 10 मोबाइल, 3 कैलकुलेटर और सट्टे का हिसाब बरामद। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112 के तहत दर्ज हुआ मुकदमा। पुलिस का अवैध कारोबारियों पर कड़ा प्रहार।

झालावाड़। राजस्थान के झालावाड़ जिले में संगठित अपराध और अवैध सट्टा कारोबार के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। झालरापाटन थाना पुलिस ने पशुपतिनाथ मंदिर जैसे पवित्र स्थल के पीछे चल रहे काले कारोबार की जड़ों पर प्रहार करते हुए तीन शातिर खाईवालों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में शुरू हुए इस विशेष अभियान के तहत पुलिस ने न केवल सट्टेबाजों को दबोचा, बल्कि उनके पास से आधुनिक तकनीक और भारी भरकम हिसाब-किताब भी बरामद किया है। यह कार्यवाही क्षेत्र में सक्रिय उन गिरोहों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो तकनीक की आड़ में सट्टे का जाल फैला रहे थे।
पुलिस टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि पशुपतिनाथ मंदिर के पीछे कुछ लोग संगठित होकर बड़े पैमाने पर सट्टे की खाईवाली कर रहे हैं। सूचना की तस्दीक होते ही झालरापाटन थानाधिकारी श्रीमती अल्का के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने घेराबंदी कर दबिश दी। मौके पर पुलिस ने हरिशंकर पुत्र किशनलाल भील, चेतन पुत्र पूरीलाल मील और नरेन्द्र कुमार पुत्र छोटूलाल माली को रंगे हाथों सट्टे की पर्चियां काटते हुए गिरफ्तार किया। पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि यह गिरोह केवल नकद ही नहीं, बल्कि फोनपे और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी दांव लगवा रहा था। मौके से 6000 रुपये की नकद राशि के साथ-साथ 10 मोबाइल फोन, 3 कैलकुलेटर और लाखों के सट्टे का हिसाब-किताब बरामद किया गया है।
कानूनी दृष्टिकोण से यह कार्यवाही इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112 के तहत संगठित अपराध का मामला दर्ज किया है। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में से हरिशंकर और नरेन्द्र कुमार का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। हरिशंकर के विरुद्ध पूर्व में हत्या के प्रयास (307) सहित राजस्थान जुआ अध्यादेश के करीब 11 मामले दर्ज हैं, वहीं नरेन्द्र कुमार भी पूर्व में कई बार सट्टा अधिनियम के तहत पकड़ा जा चुका है। आरोपियों का यह जाल इतना गहरा था कि वे अलग-अलग मोहल्लों से आकर एक संगठित इकाई के रूप में काम कर रहे थे, जिसमें चेतन निवासी असनावर भी इनका प्रमुख सहयोगी था।
इस सफल ऑपरेशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचन्द मीणा और पुलिस उप अधीक्षक हर्षराज सिंह खरेडा के सुपरविजन में थानाधिकारी अल्का, उप निरीक्षक सुनील कुमार, हेड कांस्टेबल प्रीतम सिंह, सीताराम, कांस्टेबल पवन कुमार, मुकेश कुमार, विजय सिंह, महिला कांस्टेबल धन्नी और चालक प्रवीण कुमार की सराहनीय भूमिका रही। इस पूरे मामले में आसूचना अधिकारी करण सिंह की विशेष भूमिका रही, जिनकी सटीक जानकारी ने इस संगठित गिरोह को ध्वस्त करने में मदद की। पुलिस की इस कार्यवाही ने स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बिगाड़ने वाले और समाज में अपराध का जहर घोलने वाले संगठित गिरोहों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

