झालावाड़: प्रमोद शर्मा ने ऑपरेशन शटर डाउन को पीपलोदी हादसे से ध्यान भटकाने का षड्यंत्र बताया
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पीपलोदी स्कूल हादसे के जिम्मेदारों को बचाने के लिए पुलिस ने निर्दोष लोगों को साइबर ठगी के मामले में फंसाया है।

झालावाड़ में शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान युगांतर अध्यक्ष प्रमोद शर्मा पुलिस की कार्यप्रणाली और ऑपरेशन शटर डाउन की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए।
पत्रकार वार्ता में गंभीर आरोप
झालावाड़, 14 फरवरी शनिवार को अपने स्थानीय कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए युगान्तर के अध्यक्ष व पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने कहा कि—
"झालावाड़ पुलिस द्वारा चलाया गया ओपरेशन शटरडाउन मनोहरथाना क्षेत्र के पिपलोदी गांव में हुए स्कूल हादसा जिसमें कई बच्चों को अपनी जान गवानी पड़ी थी एवं यह मामला पूरे देश में फैल रहा था जिसके कारण यहां के नेता, अधिकारी एवं प्रभावशाली व्यक्तियों के कठघरे में खड़ा किया जा रहा था तब झालावाड़ के उच्चतम पद स्थापित नेता, अधिकारी और पुलिस द्वारा इस मामले को दबाने के लिए एक षड़यंत्र रचा गया जिसमें इसकी जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक अमित कुमार को दी गई और उन्होंने एक योजना बना कर मनोहरथाना क्षेत्र को टारगेट कर ऑपरेशन शटर डाउन को अंजाम दिया गया।"
एफ.आई.आर. और जांच प्रक्रिया पर सवाल
शर्मा ने बताया कि जिस प्रकार योजना बनी उसी को मूर्तरूप देते हुए एक अज्ञात व्यक्ति/आमनागरिक (जानकारी गुप्त) द्वारा 08.08.2025 पुलिस उप अधीक्षक साइबर थाना झालावाड़ के सक्षम एक शिकायत एफ.आई.आर. के अनुसार परिवादी पार्ट-3 क्रमांक 06 द्वारा प्रस्तुत परिवाद एक संदिग्ध व्यक्ति आसिक जो कि गोडिया पुलिस थाना कामखेड़ा का रहने वाला है के विरूद्ध दिया गया एवं उसकी जानकारी गोपनीय रखने के लिए पुलिस से निवेदन किया।
- यह आमनागरिक गोपनीय द्वारा दी गई जानकीर को आधार बना झालावाड़ पुलिस ने उसकी शिकायत को गम्भीरता से लेते हुए छानबीन शुरू की।
- इसमें पाया गया कि आसिक अली पुत्र ईशाले खान निवासी मेवाती मोहल्ला गोदिया पोस्ट बांसखेड़ी तहसील मनोहरथाना व उसके परिजनों के नाम व बैंक खाते है।
- लेकिन अपने कान्स्टेबल रवि सेन 1591 साइबर पुलिस थाना द्वारा दर्ज रिपोर्ट दरमियान दिन 01.01.2021 से 31.08.2025 (थाना जहां सूचना प्राप्त हुई 22.10.2025) ने यह एफ.आई.आर. में उल्लेखित नहीं किया कि आसिक अली कहा काम करता था उसने किस प्रकार से सरकारी योजनाओं में घपला किया।
षड़यंत्र के तहत की गई गिरफ्तारियां
शर्मा ने बताया कि बाद अनुसंधान प्रक्रिया में इसी एफ.आई.आर. में पुलिस द्वारा 16 व्यक्तियों को मुलजिम बनाया गया। जिसमें दौराने अनुसंधान लगभग आज तक 48 व्यक्ति कुल मुलजिम बनाये, यानि एक गिरोह जो वर्ष 2021 से लेकर पुलिस से प्राप्त जानकारी 31.08.2025 तक इन सभी ने मिलकर सरकारी योजनाओं में करोड़ो का चुना सरकार को लगाया यह पुलिस के कथनानुसार है।
पुलिस द्वारा जब कड़ी से कड़ी जोड़ने का चक्र चला तब यह बात सामने आई की अगर एक या चार पांच व्यक्तियों को जोड़कर कहानी तैयार करते है तो मुद्दा इतना बड़ा नहीं बनेगा, इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस घोटाले को साइबर क्राइम का नाम देते हुए लगभग 22 निर्दोष लोगों को इससे जोड़कर इसे अन्तर्राज्यी ठग गिरोह का नाम देकर ऑपरेशन शटर डाउन चलाया गया।
ड्रैमेटिक फोटो सेशन और मीडिया सुर्खियां
शर्मा ने इस बात का खुलासा करते हुए कहा कि—
"पूर्ण योजना बनाकर पुलिस ने 70 टीमों का गठन किया और गोवर्धन पूजा वाले दिन सब को सुबह 5 बजे से लेकर 7-8 बजे तक एक साथ उठा लिया गया और उन्हें मण्डावर थाना जिला झालावाड़ लाया गया जहां से एक पुछताछ का क्रम चलाया और एक ड्रामेटिक तरीके से सभी व्यक्ति (साइबर ठग) को एक साथ बैठा कर पुलिस अधीक्षक अमित कुमार और एस.डी.एम. सहित पुलिस अधिकारी व सिपाहियों का एक साथ फोटो सेशन कर अखबार की हेडलाईन व एक बहुत बड़ा ऑपरेशन करके टीवी मिडिया में सुर्खिया बटोरना शुरू कर दिया। इससे झालावाड़ सहित सम्पूर्ण देश के लोगो का ध्यान पिपलोदी प्रकरण से डाईवर्ट कर पुलिस द्वारा किये गये ओपरेशन शरट डाउन की और आकर्षित करवाने में यहां के नेता व अधिकारी पूर्णतयाः कामयाब हो गये।"
अभियुक्तों की सच्चाई और पुलिस की कहानी
शर्मा ने कहा कि भले ही पुलिस ने इस ओपरेशन के माध्यम से पंजाब से लाये गये संदीप व सुमन्त अकतासा से गिरफ्तार किये, कुलदीप, अंकित, हरिप्रसाद, छोटूलाल, बालमुकन्द, युवराज सिंह, पंकज गुर्जर, परमानन्द जैसे 22 व्यक्ति जो कैसे साइबर फ्रोड में शामिल है इसके विषय में कुछ व्यक्तियों के बारे में प्राप्त जानकारी अनुसार यह है:
- संदीप शर्मा व सुमन्त शर्मा: संदीप शर्मा जो कि मूलतः जालंधर पंजाब का रहने वाला है और एक अपनी एड एजेनसी चलाता है। वहीं सुमन्त शर्मा यह भी जालंधर का ही रहने वाला है। जिनसे पुलिस कथनानुसार साइबर क्राइम का मुख्य अभियुक्त रामावतार सैनी सुमन्त से सम्पर्क कर संदीप द्वारा एक सरकारी योजना यानी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की वेबसाइट तैयार करने के लिए अपना स्वयं का एक विड़ियो बनाकर बताता है लेकिन संदीप ऐसी वेबसाइट बनाने के लिए साफ इंकार कर देता है तो रामावतार उनसे सरकारी नहीं स्वयं मणिपुरा की वेबसाइट तैयार करता है जिसमें किसी प्रकार का कोई ट्रांजिक्शन नहीं होता है इसके लिए वह संदीप को 2,50,000/- रूपये के आस-पास देता है और यह ट्रांजिक्शन बैंक के माध्यम से होता है जिसकी जानकारी संदीप और सुमन्त ने पुलिस अनुसंधान अधिकारी को भी दी यहां एक बात जो आरम्भिक तौर पर देखने में आती है कि पुलिस तलवार बनाने वाले को पकड़ती है या फिर उस निर्मित तलवार से अपराध करने वाले अपराधी को।
- कुलदीप कारपेन्टर: जो मूलतः अकतासा का रहने वाला है जो पूर्व में ई-मित्र संचालक की दुकान पर काम करता था बाद में उसने काम छोड़ा और जब ई-मित्र की दुकान वहां से हट गई तो उसने स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए उसी दुकान को किराये पर लेकर मोबाइल ठीक करने की दुकान चलाने लगा उसका कसूर इतना था कि वह वहां कार्य करता था, इसी बात को आधार बना कर उसे गिरफ्तार किया गया।
- छोटूलाल व बालमुकनद: जो दोनो मनोहरथाना क्षेत्र के रहने वाले है इनको इस योजना में साइबर ठगी के आरोप में इसलिए गिरफ्तार किया कि यह दोनो भाई जिसमें एक विद्यार्थी है व दूसर स्वयं दुकान संचालित करता है जहां जेरोक्स नकल निकालना आदि काम किये जाते है वहां साइबर ठगी जैसे कोई कार्य उन्होंने नहीं किया।
- पंकज गुर्जर: शर्मा ने बताया कि अनुसंधान के दौरान पंकज गुर्जर निवासी सारोला जो कि अकलेरा तहसील में रीडर के पद पर कार्यरत था जिसका मित्र कुलदीप ढोली जो पूर्व में ही साइबर ठगी में लिपत है के नाम बताने के आधार पर 10000 मात्र ट्रांजिक्शन जो पंकज द्वारा कुलदीप को दिए गए कि उसे तहसीलदार की आई.डी. द्वारा ओटीपी निकाल कर देने जैसे गम्भीर आरोप भी लगाये गये।
- युवराज सिंह: ठीक उसी प्रकार युवराज सिंह जो कि झालावाड़ सीएमएचओ ऑफिस में संविदा कर्मी के नाते कार्यरत था, उस पर जो दौरान-ए-अनुसंधान आरोप लगाया गया कि वह फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनाकर सरकारी योजना की लूट में संलिप्त है, इसी आरोप के साथ उसकी गिरफ्तारी की गयी।
निष्कर्ष: अधिकारियों को बचाने की साजिश
प्रमोद शर्मा ने इन कुछ उदाहरणों को दृष्टिगत करते हुए बताया कि चाहे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि हो वृद्धावस्था पेंशन हो या दिव्यांगजन के सर्टिफिकेट जारी करने जैसे व अन्य सभी सरकारी योजनाएं जो कि सरकार के गहन निर्देशन में जिले के प्रशासनिक अधिकारी, राजस्व अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों की संलिप्ता के बिना किसी भी प्रकार का घोटाला या घटला संभव नहीं है।
यह आश्चर्य की बात है कि 48 व्यक्तियों को मुलजिम बनाया गया जिसमें किसी भी विभाग के कोई भी अधिकारी की मिलीभगत होने के बाद भी एक भी अधिकारी की गिरफ्तारी न होना यह इस बात का स्पष्ट संदेश देता है कि पुलिस द्वारा किया गया अनुसंधान अपूर्ण और मेलाफाइड इंटेशन को लेकर दोषी अधिकारियों को लाभ देकर निर्दोष को आरोपी बनाया जाना इस बात की ओर संकेत करके पुष्टि करता है कि यह पूरा ओपरेशन शटर डाउन मात्र पीपलोदी प्रकरण से जनता का ध्यान हटाने का द्योतक है।
दिनांक- 14.02.2026
भवदीय (प्रमोद शर्मा)

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