झालावाड़, 27 मार्च। झालावाड़ नगर परिषद की महत्वपूर्ण स्टोर शाखा में एक संविदाकर्मी (केयरटेकर) को नियुक्त किए जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है, जिससे शहर की राजनीति में उबाल आ गया है। पूर्व पार्षदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर एवं नगर परिषद प्रशासक को ज्ञापन सौंपकर इस नियुक्ति पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और आयुक्त की कार्यप्रणाली पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप जड़े हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि नगर परिषद की स्टोर शाखा एक अत्यंत संवेदनशील विभाग है, जहाँ प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की सामग्री की खरीद और महत्वपूर्ण निविदाएं (टेंडर) जारी करने के साथ उन्हें खोलने की प्रक्रिया संपादित की जाती है। पूर्व पार्षदों ने सवाल उठाया कि लंबे समय से इस शाखा में लिपिक के रूप में कार्यरत पवन जोशी को हटाकर पहले भानुप्रताप सिंह और फिर विवादों में रहने वाले सोनू कुमार नागर को क्यों लगाया गया। विशेष रूप से यह तथ्य विचारणीय है कि सोनू कुमार नागर एक सीएलसी (केयरटेकर) कर्मचारी हैं, जबकि आयुक्त अशोक शर्मा द्वारा 23 जनवरी 2026 को ही समस्त सीएलसी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए जा चुके थे। इसके बावजूद, सोनू कुमार नागर को नरोत्तम मेघवाल के साथ अतिरिक्त प्रभार दिया जाना नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

पूर्व पार्षद अहफाज अली ने आयुक्त अशोक शर्मा की पृष्ठभूमि पर प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि वे स्वयं टी एंड एम सर्विसेज कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारी रहे हैं और वर्ष 2019 में सेवाएं समाप्त होने के बाद हाईकोर्ट के स्थगन आदेश (स्टे) के आधार पर डीपीओ पद पर कार्यरत रहे। उन्होंने दावा किया कि आयुक्त की कार्यशैली हमेशा से सरकारी कर्मचारियों के बजाय अपने पसंदीदा सीएलसी कर्मियों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाने की रही है, जिससे भ्रष्टाचार चरम पर है। पूर्व में भी कार्यवाहक आयुक्त रहते हुए विवादों के कारण जिला कलेक्टर द्वारा उनका एग्रीमेंट रोका गया था और उन पर जुर्माना भी लगाया गया था।

पार्षदों ने शिकायत की है कि जब से अशोक शर्मा ने कार्यभार संभाला है, नगर परिषद में लीज ट्रांसफर और पट्टे बनाने जैसे आमजन से जुड़े कार्य लंबित पड़े हैं। शहर की बुनियादी व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं; गलियों में अंधेरा पसरा है, नाले-नालियां कचरे से अटी पड़ी हैं और सफाई व्यवस्था बदहाल है। ज्ञापन के माध्यम से पूर्व पार्षद रमजान खान, अहफाज अली, सुनील मीणा और साजिद खान सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने और आयुक्त के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने की मांग की है ताकि सरकारी तंत्र में विश्वास और पारदर्शिता पुनः बहाल हो सके।

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