झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में कुर्सी की जंग, कर्मचारियों के वेतन पर संकट!
पूर्व अधीक्षक डॉ. अशोक शर्मा ने 7 अक्टूबर के आदेश को नियम विरुद्ध बताया, दीपावली से पहले वेतन भुगतान पर असमंजस की स्थिति।

अधीक्षक पद और वित्तीय अधिकारों को लेकर दो अधिकारियों में टकराव, नियमों की दुहाई के बीच वेतन भुगतान का मामला पहुंचा निदेशक और जिला कलेक्टर तक।
झालावाड़। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज एवं एसआरजी चिकित्सालय में इन दिनों मरीजों के इलाज से ज्यादा प्रशासनिक कुर्सी और वित्तीय अधिकारों को लेकर खींचतान चर्चा का विषय बनी हुई है। अधीक्षक की कुर्सी किसकी होगी, वित्तीय अधिकार किसके पास रहेंगे और कर्मचारियों के वेतन बिलों पर हस्ताक्षर कौन करेगा? इन सवालों के बीच सरकारी नियमों और आदेशों की ऐसी जंग छिड़ी है कि मामला चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक से लेकर जिला कलेक्टर तक पहुंच गया है।
मामले में पूर्व अधीक्षक डॉ. अशोक शर्मा ने 3 नवंबर 2026 को प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. संजय पोरवाल को लिखे पत्र में 7 अक्टूबर को जारी अधीक्षक बदलने के आदेश को नियम विरुद्ध बताया है। उनका दावा है कि अधीक्षक पद पर नियुक्ति और हटाने के अधिकार को लेकर निर्धारित नियमों की अनदेखी की गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधीक्षक पद और वित्तीय अधिकारों को अलग-अलग कार्यालयीय शक्तियों के रूप में समझे बिना आदेश जारी किए जा रहे हैं।
डॉ. अशोक शर्मा ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि डॉ. माधुरी मीणा द्वारा अधीक्षक पद का उपयोग करते हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन बिल कोष कार्यालय में भेजे गए, जबकि उनके अनुसार संबंधित वित्तीय शक्तियां उपलब्ध नहीं थीं। पत्र में अक्टूबर 2026 के वेतन बिलों को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है।
डॉ. शर्मा का कहना है कि जब तक 7 अक्टूबर का आदेश निरस्त नहीं होता और अधीक्षक का कार्यभार विधिवत नहीं सौंपा जाता, तब तक वित्तीय नियमों के अनुरूप ही भुगतान की प्रक्रिया होनी चाहिए। उन्होंने सितंबर 2026 के वेतन भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया है।
दूसरी तरफ, 3 नवंबर 2026 को प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. संजय पोरवाल की ओर से जारी पत्र में डॉ. अशोक शर्मा को निर्देशित किया गया कि वर्तमान में आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) के अधिकार उनके नाम आवंटित हैं। वित्तीय सलाहकार कार्यालय से भी दीपावली पर्व को देखते हुए कर्मचारियों के वेतन भुगतान में किसी प्रकार का विलंब नहीं करने के निर्देश प्राप्त हुए हैं।
पत्र में स्पष्ट कहा गया कि वित्तीय नियमों के अनुसार कर्मचारियों के वेतन का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए और इस कार्य को प्राथमिकता से पूरा किया जाए।
पूर्व अधीक्षक डॉ. अशोक शर्मा ने अपने पत्र की प्रतिलिपि चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक, राजस्थान चिकित्सा शिक्षा सोसायटी के वित्तीय सलाहकार तथा जिला कलेक्टर झालावाड़ को भी भेजी है। इससे स्पष्ट है कि मामला अब केवल मेडिकल कॉलेज के आंतरिक प्रशासन तक सीमित नहीं रहा।
उन्होंने 30 अक्टूबर को भी निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं जिला कलेक्टर को पूरे प्रकरण से अवगत कराने का उल्लेख किया है। पत्र में अधीक्षक पद के आदेश और वित्तीय अधिकारों की स्थिति स्पष्ट होने तक वेतन बिलों के भुगतान की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई गई है। अब सवाल यह है कि नियमों का पालन कौन करवा रहा है और नियमों की व्याख्या कौन कर रहा है?
मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में प्रशासनिक अधिकारों की खींचतान का असर यदि कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर पड़ता है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। एक तरफ दीपावली से पहले वेतन भुगतान के निर्देश हैं, दूसरी तरफ वित्तीय अधिकारों और अधीक्षक पद की वैधता को लेकर लिखित आपत्तियां हैं।
अब देखने वाली बात होगी कि चिकित्सा शिक्षा विभाग इस पूरे विवाद में क्या निर्णय लेता है। आखिर अधीक्षक की कुर्सी की लड़ाई में कर्मचारियों के वेतन को क्यों उलझना पड़ रहा है? क्या संबंधित आदेश नियमों के अनुरूप हैं? और वित्तीय अधिकारों की वास्तविक स्थिति क्या है?
इन सवालों का जवाब अब विभागीय जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही सामने आएगा।

Suresh Momiya, Jhalawar
नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय
परिचय
सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- दैनिक बढ़ता राजस्थान
- दैनिक कोटा ब्यूरो
- दैनिक दो गज दूरी
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
