झालावाड़। राजस्थान के झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र में सरकारी और चरागाह (चरनोट) भूमि पर बढ़ते अवैध अतिक्रमण को लेकर अब जन-आक्रोश फूटने लगा है। राष्ट्रीय क्षत्रिय महा सेना के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह पंवार ने इस गंभीर मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम मनोहर थाना उपखण्ड अधिकारी (SDM) को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने न केवल अतिक्रमण हटाने की मांग की है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े किए हैं।

घटनाक्रम की जड़ें साल 2020 से जुड़ी हैं, जब मनोहर थाना में आई टी आई (ITI) भवन निर्माण के लिए सरकार द्वारा भूमि आरक्षित की गई थी। जितेंद्र सिंह पंवार का आरोप है कि इस बेशकीमती सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। विडंबना यह है कि प्रशासन को इस संबंध में कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई धरातल पर नजर नहीं आई है। इससे पूर्व अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ द्वारा भी स्थानीय तहसीलदार और नगरपालिका अधिशासी अधिकारी को ज्ञापन देकर अतिक्रमण मुक्त कराने की गुहार लगाई गई थी, किंतु नतीजा सिफर ही रहा। न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए किसी उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया।

ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि सरकार ने पुलिस थाना, बीएसएनएल, जलदाय विभाग, विद्युत विभाग, अस्पताल और एसडीएम कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण सरकारी भवनों के निर्माण के समय जो अतिरिक्त भूमि छोड़ी थी, उसे तत्काल संरक्षित किया जाना चाहिए। अतिक्रमण की इस समस्या का सबसे वीभत्स रूप सड़कों पर देखने को मिल रहा है, जहाँ चरागाह भूमि के अभाव में बेसहारा गोवंश दिन-रात भटकने को मजबूर है। पंवार ने गौशालाओं के प्रबंधन पर भी तीखा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार द्वारा करोड़ों का अनुदान देने के बावजूद कई गौशालाओं में मौके पर गोवंश मौजूद नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी बिल और वाउचर के जरिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच होना अत्यंत आवश्यक है।

राष्ट्रीय क्षत्रिय महा सेना ने अब प्रशासन को दो-टूक शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है। जितेंद्र सिंह पंवार ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर इस दिशा में कोई सकारात्मक और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई, तो संगठन आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर उग्र धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर होगा। यह मामला अब केवल जमीन के टुकड़े का नहीं, बल्कि सरकारी संपत्तियों के संरक्षण और बेजुबान गोवंश के अधिकारों से जुड़ गया है, जिससे स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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