जयपुर/खानपुर: 16वीं राजस्थान विधानसभा के पंचम सत्र के दौरान आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग द्वारा विधायक सुरेश गुर्जर (खानपुर) के तारांकित प्रश्न संख्या 106 के जवाब में जो तथ्य सामने आए हैं, वे प्रदेश की भाजपा सरकार के 'किसान कल्याण' के दावों की पोल खोलते हैं। सरकारी रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि झालावाड़ जिले में फसल खराबे के आकलन और मुआवजे के वितरण में भारी विसंगतियां हैं, जिससे हजारों किसान न्याय के लिए भटक रहे हैं।


सरकारी जवाब के आधार पर आंकड़ों का विश्लेषण

  • पात्रता बनाम प्रस्ताव: सरकार ने स्वीकार किया है कि जिले में 33% से अधिक खराबे वाले कुल 3,42,552 काश्तकार प्रभावित हुए हैं।
  • लेकिन आश्चर्यजनक रूप से प्रशासन द्वारा केवल 2,75,822 किसानों के ही मुआवजे के प्रस्ताव भेजे गए।
  • यानी पहले ही स्तर पर 66,730 पात्र किसानों को सूची से बाहर कर दिया गया।
  • प्रशासनिक स्वीकृति में छंटनी: विभाग ने जब प्रशासनिक स्वीकृति जारी की, तो यह संख्या और घटाकर 2,62,614 कर दी गई, जिससे 13,208 किसान और लाभ से वंचित हो गए।

भुगतान की कड़वी सच्चाई

अब तक मात्र 2,34,396 किसानों के ही बिल कोष कार्यालय (Treasury) भेजे गए हैं। उसमे से भी 108396 किसानो को मुआवजा देना लंबित है। कुल 216552 पात्र किसानो को अभी तक मुआवजा नही मिला है, जिनमें से 108156 किसानो के तो अब तक प्रस्‍ताव तक नही भेजे है।

मुआवजे के नाम पर केवल 'औपचारिकता'

"विधायक सुरेश गुर्जर ने सवाल उठाया कि वर्तमान में SDRF नॉर्म्स के तहत किसानों को औसतन 5,000 से 7,000 रुपये की ही सहायता मिल रही है। डीजल, खाद और बीज की बढ़ती लागत के सामने यह राशि एक क्रूर मजाक है।"


विधायक सुरेश गुर्जर ने सरकार से मांग की:

  • "सरकार स्पष्ट करे कि उन 1.08 लाख पात्र किसानों का क्या दोष है जिन्हें मुआवजा प्रक्रिया से बाहर रखा गया है? क्या सरकार की मंशा उन्हें राहत देने की है या केवल कागजी खानापूर्ति की?"
  • "क्या सरकार आज की महंगाई को देखते हुए SDRF के पुराने नियमों में संशोधन कर मुआवजे की राशि बढ़ाने का साहस दिखाएगी?"
  • "जिनकी राशि ट्रेजरी में आ गई उन 1 लाख से अधिक किसानो को भी शीघ्र मुआवजा दिया जाये।"

विधायक गुर्जर ने चेतावनी दी है कि यदि वंचित रहे सभी 1 लाख से अधिक किसानों को शीघ्र भुगतान नहीं किया गया और मुआवजे की राशि में न्यायोचित वृद्धि नहीं हुई, तो वे किसानों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन करेंगे।

Pratahkal Bureau

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