झालावाड़ जिले की सुनेल पंचायत समिति की धामनिया ग्राम पंचायत में श्मशान घाट के विकास कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, जबकि मौके पर दिखाई देने वाले कार्य सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते।

"भ्रष्टाचार केवल सरकारी खजाने की चोरी नहीं होता, बल्कि वह गरीब की थाली से निवाला, मरीज की दवा और बच्चे की पढ़ाई भी छीन लेता है।" ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों के विकास के लिए करोड़ों रुपये भेज रही है, लेकिन यदि विकास की राशि रास्ते में ही खत्म हो जाए तो गांवों तक वास्तविक विकास कैसे पहुंचेगा। इसी सवाल को लेकर धामनिया गांव के लोग अब प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं।

ग्रामीणों एवं स्थानीय सूत्रों के अनुसार काली तलाई क्षेत्र के धामनिया गांव में मॉडल श्मशान घाट, टीनशेड एवं पौधारोपण के नाम पर मनरेगा योजना से लगभग 14 लाख रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा उसी श्मशान की चारदीवारी निर्माण के लिए सामान्य योजना से करीब 5 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इस प्रकार सरकारी रिकॉर्ड में कुल लगभग 19 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए हैं।

ग्रामीणों का दावा है कि मौके पर दिखाई देने वाला निर्माण कार्य आठ लाख रुपये से अधिक का नहीं है। यदि यह दावा जांच में सही पाया जाता है, तो मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर प्रकरण माना जा सकता है।

इन आरोपों के केंद्र में ग्राम विकास अधिकारी राहुल गुप्ता हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भुगतान से लेकर कार्यों के सत्यापन तक पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि गुणवत्ता और वास्तविक मूल्यांकन के बिना लाखों रुपये का भुगतान कैसे किया गया। साथ ही यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या माप पुस्तिका (एमबी) और तकनीकी परीक्षण केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि नियमों की अनदेखी करते हुए प्रशासक पीरूलाल मेघवाल, जो सरपंच के पुत्र बताए जाते हैं, को साफ-सफाई कार्य के नाम पर हजारों रुपये का भुगतान किया गया। यदि यह भुगतान नियमों के विपरीत हुआ है, तो यह हितों के टकराव का विषय भी बनता है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

गांव में यह चर्चा भी है कि पंचायत का संचालन आधिकारिक रूप से जिनके हाथ में होना चाहिए, वास्तविक निर्णय उनके बजाय किसी अन्य व्यक्ति के प्रभाव में लिए जा रहे हैं। यदि ऐसा है, तो यह पंचायती राज व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

इस संबंध में जब सरपंच पुत्र पीरूलाल से श्मशान निर्माण और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर पक्ष जानना चाहा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है और वे ग्राम विकास अधिकारी से पूछकर बताएंगे। हालांकि, दो दिन बीत जाने के बाद भी उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि यह खामोशी भी कई सवाल खड़े कर रही है।

अब इस पूरे मामले में जांच को ही सच्चाई सामने लाने का आधार माना जा रहा है। यदि ग्रामीणों के आरोप और उपलब्ध दस्तावेज सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कार्यों की तकनीकी जांच, भौतिक सत्यापन, माप पुस्तिका, भुगतान अभिलेख तथा गुणवत्ता परीक्षण कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। अनियमितता सिद्ध होने की स्थिति में सरकारी धन की वसूली के साथ संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किया जाना आवश्यक होगा।

Pratahkal Bureau

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