बकानी (झालावाड़)। कुछ विभूतियां धरा पर जन्म लेकर न केवल अपना इतिहास रचती हैं, बल्कि अपने कृतित्व से युगों-युगों तक जीवित रहती हैं। जैन आध्यात्मिक संगीत के आकाश में ध्रुव तारे की भांति चमकने वाले 'संगीत सम्राट' स्वर्गीय नमजी जैन एक ऐसी ही शख्सियत थे, जिनकी स्वर लहरियां आज भी जैन समाज के रग-रग में रची-बसी हैं। उनकी इसी गौरवशाली विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने और समाज सेवा के संकल्प को विस्तार देने के उद्देश्य से 'स्वर्गीय जैन संगीत सम्राट श्री नमजी जैन चैरिटेबल ट्रस्ट' का विधिवत गठन किया गया है। इस ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा बकानी स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित 'पूर्व छात्र सेवा समिति' के वार्षिक उत्सव के दौरान की गई, जहाँ भक्ति, संगीत और सेवा का एक अनूठा संगम देखने को मिला।

अपने जीवनकाल में 5000 से अधिक भजनों की रचना करने वाले नमजी जैन की लेखनी में वो जादू था कि श्रोता भक्ति रस में सराबोर हो जाते थे। आचार्य शांति सागर जी महाराज द्वारा 'संगीत सम्राट' और बालाचार्य योगेंद्र सागर जी द्वारा 'जैन जगत का कोहिनूर' की उपाधियों से अलंकृत नमजी जैन की रचनाएं जैसे "कुंडलपुर में बधाई", "थारी बाकडली झाड़या में रास्ता भुलाया मारा पारस जी", और "चांदखेड़ी का राजा" आज भी हर मंदिर और आयोजन की शान हैं। श्री महावीर जी और केशोरायपाटन जैसे अतिशय क्षेत्रों में आज भी उन्हीं की लिखी आरतियां गूंजती हैं। हालांकि, साहित्य जगत के लिए यह विडंबना ही रही कि कई गायकों ने उनकी रचनाओं से उनका नाम हटाकर स्वयं का नाम जोड़ लिया, जिसे लेकर समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने चिंता भी व्यक्त की है।

परंपरा को जीवंत रखते हुए उनके सुपुत्र, आशु कवि और प्रख्यात साहित्यकार राजकुमार जैन 'टिल्लू' ने इस चैरिटेबल ट्रस्ट की नींव रखी है। ट्रस्ट के गठन के साथ ही इसके दायित्वों का भी बंटवारा किया गया है, जिसमें संरक्षक के रूप में राजकुमार जैन 'टिल्लू' स्वयं मार्गदर्शन करेंगे। सचिव पद की जिम्मेदारी प्रतीक जैन 'इशू' को सौंपी गई है, जबकि आशीष जैन 'पप्पी' को अध्यक्ष और कविम जैन को कार्याध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस पुनीत कार्य में टीवी एंकर महिम जैन, राष्ट्रीय कवि अतुल जैन, पत्रकार अखिलेश जैन, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन 'पार्श्वमणि', पत्रकार दिवाकर जैन और विवेक जैन जैसे प्रबुद्ध जन सक्रिय रूप से जुड़कर अपनी सेवाएं समर्पित कर रहे हैं।

वार्षिक उत्सव के भव्य मंच पर ट्रस्ट के संरक्षक राजकुमार जैन 'टिल्लू' ने संगीत की सेवा करने वाले चार विशिष्ट साधकों को सम्मानित कर ट्रस्ट की सामाजिक गतिविधियों का श्रीगणेश किया। इन प्रतिभाओं को प्रशस्ति पत्र, माला, शाल और नकद राशि प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन 'पार्श्वमणि' ने बताया कि यह ट्रस्ट न केवल नमजी जैन की हस्तलिखित पांडुलिपियों का संरक्षण करेगा, बल्कि संगीत और साहित्य के क्षेत्र में उभरते कलाकारों को मंच प्रदान कर समाज की सेवा में अग्रणी भूमिका निभाएगा। यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि थी, बल्कि बकानी की माटी के उस गौरव को पुनर्जीवित करने का प्रयास था, जिसने जैन संगीत को वैश्विक पटल पर नई पहचान दी।

Pratahkal Bureau

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