झालावाड़: ब्रजकंवर स्कूल के गेट पर निजी निर्माण, प्रधानाचार्य ने दी अनुमति
मंगलपुरा स्थित राजकीय बालिका स्कूल के मुख्य द्वार पर निजी कब्जे और निर्माण कार्य से विवाद, शिक्षा विभाग और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।

झालावाड़ के मंगलपुरा स्थित ब्रजकंवर राजकीय बालिका स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार के ऊपर हो रहा निजी निर्माण कार्य, जिसे कथित तौर पर स्कूल प्रशासन ने मरम्मत के बदले अनुमति दी है।
दान में मिली शिक्षा के मंदिर पर 'सिस्टम' का प्रहार: ब्रजकंवर स्कूल के गेट पर निजी कब्जा, प्रधानाचार्य ने दी अनुमति
उप-शीर्षक: अजीब तर्क- स्कूल दान कर दिया पर गेट के ऊपर की छत बेच दी? नगर परिषद और शिक्षा विभाग की कार्यशैली घेरे में।
झालावाड़। शहर के सबसे व्यस्ततम व्यावसायिक क्षेत्र मंगलपुरा स्थित राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (ब्रजकंवर स्कूल) इन दिनों अपनी शिक्षा के लिए नहीं, बल्कि अपनी जमीन के 'अनोखे सौदे' को लेकर चर्चा में है। जिस स्कूल की जमीन और भवन कभी राजपरिवार द्वारा बेटियों की शिक्षा के लिए दान किया गया था, आज उसी स्कूल के मुख्य द्वार के ऊपर एक निजी व्यक्ति द्वारा धड़ल्ले से निर्माण कार्य किया जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि इस अवैध अतिक्रमण को खुद स्कूल प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों का मौन संरक्षण प्राप्त है।
मरम्मत के बदले 'आसमान' का सौदा
सूत्रों के अनुसार, स्कूल की प्रधानाचार्य ने एक निजी व्यक्ति को गेट के ऊपर निर्माण की अनुमति इस शर्त पर दे दी कि:
- वह व्यक्ति स्कूल का नया गेट बनवाकर देगा।
- वह परिसर के अंदर की टूट-फूट की मरम्मत कराएगा।
सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी संपत्ति के रखरखाव के लिए सरकार के पास बजट नहीं है, जो एक प्रधानाचार्य को स्कूल की 'हवाई जमीन' का सौदा किसी निजी व्यक्ति से करना पड़ा?
सीबीईओ का दावा: राजदादी ने बेच दिया था गेट का ऊपरी हिस्सा
जब इस गंभीर विषय पर ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी (CBEO) से बात की गई, तो उन्होंने एक नया ही तर्क पेश किया। उनका कहना है कि:
"राजदादी ने स्कूल तो दान किया था, लेकिन गेट के ऊपर का हिस्सा बेच दिया था, हमने कागज देखे हैं।"
अब बुद्धिजीवी वर्ग यह सवाल उठा रहा है कि जब पूरा स्कूल परिसर दान कर दिया गया, तो गेट के ठीक ऊपर की जगह को अलग से बेचने का क्या औचित्य? क्या यह केवल भू-माफियाओं को फायदा पहुँचाने के लिए गढ़ा गया एक कागजी खेल है?
नगर परिषद की मेहरबानी या अंधेरगर्दी?
इतना ही नहीं, नगर परिषद झालावाड़ ने भी इस पूरे प्रकरण में अपनी 'विशेष कृपा' बरसाई है। चर्चा है कि फर्जी दस्तावेजों और रसूख के दम पर इस विवादित स्थल पर आवासीय निर्माण की अनुमति जारी कर दी गई। शहर के बीचों-बीच, जहाँ से प्रशासन के आला अधिकारियों का रोजाना गुजरना होता है, वहाँ स्कूल की छत पर होता यह निर्माण प्रशासनिक अनदेखी की पराकाष्ठा है।
इन सवालों के जवाब कौन देगा?
- क्या किसी राजकीय विद्यालय की प्रधानाचार्य को सरकारी संपत्ति पर निजी निर्माण की अनुमति देने का वैधानिक अधिकार है?
- यदि राजपरिवार ने स्कूल दान किया था, तो क्या दानपत्र में गेट के ऊपर की जगह को निजी रखने का उल्लेख है?
- नगर परिषद ने एक सार्वजनिक स्कूल के गेट के ऊपर आवासीय पट्टा और निर्माण की परमिशन किस आधार पर दी?
मंगलपुरा जैसे व्यस्ततम बाजार में शिक्षा के इस मंदिर पर होते प्रहार ने यह साबित कर दिया है कि राजनीतिक रसूख और भू-माफियाओं के गठजोड़ के आगे नियम-कायदे बौने साबित हो रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इस निर्माण पर रोक लगाकर स्कूल की गरिमा बहाल करता है या फिर 'कागजों की बाजीगरी' में एक और सरकारी संपत्ति भेंट चढ़ जाएगी।

Pratahkal Bureau
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