झालावाड़: प्रभारी मंत्री ओटाराम देवासी की संवेदनशीलता से दिव्यांग विशाल के जीवन में आया नया सवेरा
झालावाड़ के गोविन्दपुरा में आयोजित रात्रि चौपाल में प्रभारी मंत्री ओटाराम देवासी ने दिव्यांग विशाल लोधा की गुहार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए ट्राईसाईकिल उपलब्ध कराई। सामाजिक न्याय विभाग की सक्रियता से विशाल को मिली नई पहचान और स्वावलंबन। प्रशासनिक संवेदनशीलता और जनसुनवाई के सकारात्मक प्रभाव पर आधारित एक विशेष रिपोर्ट।

झालावाड़। झालावाड़ जिले की झालरापाटन पंचायत समिति के ग्राम गोविन्दपुरा में सोमवार की रात केवल जनसमस्याओं के समाधान की गवाह नहीं बनी, बल्कि एक दिव्यांग युवक के जीवन में स्वावलंबन और मुस्कान का नया अध्याय भी लिख गई। राज्य के ग्रामीण विकास, पंचायतीराज, आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के राज्य मंत्री एवं जिला प्रभारी मंत्री श्री ओटाराम देवासी की अध्यक्षता में आयोजित रात्रि चौपाल उस वक्त भावुक क्षणों में बदल गई, जब एक दिव्यांग ग्रामीण विशाल लोधा ने अपनी लाचारी को मंत्री के समक्ष साझा किया।
रात्रि चौपाल के दौरान जब ग्रामीण अपनी बुनियादी सुविधाओं और समस्याओं पर चर्चा कर रहे थे, तभी गोविन्दपुरा निवासी विशाल लोधा ने प्रभारी मंत्री के पास पहुँचकर अपने संघर्ष की कहानी सुनाई। शारीरिक अक्षमता के कारण चलने-फिरने में असमर्थ विशाल ने बताया कि कैसे वह अपने दैनिक कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर है। एक ट्राईसाईकिल की अनुपलब्धता उसके और उसकी आत्मनिर्भरता के बीच सबसे बड़ी बाधा बनी हुई थी। विशाल की इस मार्मिक गुहार को प्रभारी मंत्री श्री ओटाराम देवासी ने न केवल धैर्यपूर्वक सुना, बल्कि तत्काल प्रभाव से राहत प्रदान करने का संकल्प लिया।
प्रभारी मंत्री ने विशाल की समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक संवेदनशीलता का परिचय दिया और मौके पर ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिव्यांग जनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें समान अवसर प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्री के निर्देश मिलते ही विभाग सक्रिय हुआ और बिना किसी विलंब के विशाल के लिए ट्राईसाईकिल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की त्वरित कार्रवाई के परिणामस्वरूप जब विशाल को ट्राईसाईकिल सौंपी गई, तो उसका चेहरा खुशी से खिल उठा। जो विशाल कल तक दूसरों के सहारे का मोहताज था, अब वह अपनी नई सवारी के साथ स्वतंत्र रूप से विचरण करने के लिए तैयार था। उसकी आँखों की चमक इस बात की तस्दीक कर रही थी कि सरकार की संवेदनशीलता ने उसे केवल एक मशीन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीने का जरिया दिया है।
यह घटनाक्रम इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि शासन और प्रशासन में इच्छाशक्ति हो, तो रात्रि चौपाल जैसे मंच अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकते हैं। विशाल लोधा को मिली यह मदद न केवल एक व्यक्ति की सहायता है, बल्कि समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में एक सार्थक कदम भी है।

Pratahkal Bureau
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