विकास की धूल में घिरा झालावाड़: अवैध गिट्टी क्रेशरों से किसानों में बढ़ी चिंता, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
झालावाड़ के मालीपुरा, खेरासी और गोविंदपुरा क्षेत्र में कथित अवैध गिट्टी क्रेशरों को लेकर किसानों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। धूल प्रदूषण, फसलों को नुकसान और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच अब प्रशासनिक कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

मालीपुरा-खेरासी क्षेत्र में संचालित गिट्टी क्रेशर से लगातार भारी मात्रा में धूल उड़ रही है, जिससे पर्यावरण, फसलों और जनस्वास्थ्य को नुकसान हो रहा है और ग्रामीण कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जिले के मालीपुरा, खेरासी और गोविंदपुरा क्षेत्र के ग्रामीणों एवं किसानों ने कृषि भूमि के बीच संचालित किए जा रहे कथित अवैध गिट्टी क्रेशरों को लेकर जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इन क्रेशरों से फैल रहे धूल प्रदूषण, कृषि भूमि को हो रहे नुकसान तथा जनस्वास्थ्य पर पड़ रहे संभावित दुष्प्रभावों को लेकर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि रीको क्षेत्र में कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा गिट्टी क्रेशरों का संचालन किया जा रहा है, जिनसे निकलने वाली धूल आसपास के गांवों और कृषि क्षेत्रों तक पहुंच रही है। उनका कहना है कि इससे न केवल पर्यावरण प्रभावित हो रहा है, बल्कि खेती-किसानी पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। किसानों के अनुसार वर्तमान में बुवाई का समय है और लगातार उड़ रही धूल फसलों एवं कृषि कार्यों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने दावा किया है कि संबंधित क्रेशर आबादी क्षेत्रों के काफी निकट संचालित हो रहे हैं। उनके अनुसार रीको कॉलोनी की दूरी लगभग 200 मीटर, मालीपुरा गांव की दूरी लगभग 300 मीटर तथा खेरासी गांव की दूरी करीब 500 मीटर है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति निर्धारित मानकों और पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप नहीं है।
किसानों ने यह भी आशंका जताई है कि लंबे समय तक धूल के संपर्क में रहने से क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों की ओर से सुनील, रामप्रसाद, बबलू, बनवारी, गोविंद सहित दर्जनों किसानों ने संयुक्त रूप से ज्ञापन प्रस्तुत किया। किसानों के अनुसार शिकायत को 24 जून को पीसीआर में डायरी नंबर 2 पर दर्ज किया गया और आगे की कार्रवाई के लिए जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौर तक प्रेषित कर दिया गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कथित रूप से अवैध रूप से संचालित क्रेशरों की जांच कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र के किसानों, ग्रामीणों और पर्यावरण को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।
अब पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर खेती, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर और अधिक गंभीर रूप से दिखाई दे सकता है।

Pratahkal Bureau
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