जब एक चार दिन की मासूम बच्ची जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी, तब इंसानियत ने धर्म और जाति की सभी सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। झालरापाटन निवासी हाफिज रिजवान ने समय रहते रक्तदान कर नवजात बच्ची की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और मानवता का अनूठा संदेश दिया।

जानकारी के अनुसार, नवजात "बेबी ऑफ कृष्णा" की अचानक तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने तत्काल रक्त की आवश्यकता बताई। परिवार के लिए यह बेहद कठिन और चिंताजनक समय था। अस्पताल में अपनी नवजात बेटी को जीवन के लिए संघर्ष करते देख मां की आंखों में चिंता और बेबसी साफ झलक रही थी।

इसी दौरान मुस्लिम ब्रदर्स हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन (रक्त संबंध) से जुड़े सदस्य हाफिज रिजवान को बच्ची की स्थिति की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही उन्होंने बिना किसी विलंब के अस्पताल पहुंचकर स्वेच्छा से रक्तदान किया। उनके इस कदम से बच्ची के उपचार के लिए आवश्यक रक्त समय पर उपलब्ध हो सका और परिवार को राहत मिली।

अस्पताल में मौजूद लोगों ने हाफिज रिजवान के इस मानवीय कार्य की सराहना करते हुए कहा कि खून का रंग न धर्म देखता है और न ही जाति, वह केवल एक जीवन को बचाने का माध्यम बनता है। उनके इस प्रयास ने समाज में मानवता, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी का सकारात्मक संदेश दिया है।

हाफिज रिजवान का यह कार्य इस बात का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है कि जरूरतमंद की सहायता करना ही सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ी इबादत है। उनके इस प्रेरणादायक योगदान की क्षेत्रभर में सराहना की जा रही है।

इस अवसर पर टीम रक्त संबंध ने नागरिकों से अधिक से अधिक स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील की। संस्था ने कहा कि समय पर उपलब्ध रक्त किसी मरीज के लिए जीवनदान साबित हो सकता है और एक यूनिट रक्त किसी की पूरी जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Pratahkal Bureau

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