ग्वालियर: जातिगत विसंगतियों के बीच आर्थिक आधार पर आरक्षण की गूँज, डॉ. ऋषिपाल सिंह परमार ने फूंका आंदोलन का बिगुल
ग्वालियर से उठी आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग; डॉ. ऋषिपाल सिंह परमार ने जातिगत आरक्षण की विसंगतियों पर उठाए सवाल। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट और राष्ट्रीय हिन्दू जन कल्याण संघ अब देशभर में चलाएंगे जागरूकता आंदोलन। जानिए क्यों सवर्ण समाज और हर जाति के गरीबों के लिए आर्थिक आरक्षण को बताया जा रहा है अनिवार्य और क्या है इसके पीछे का पूरा तर्क।

ग्वालियर। स्वतंत्रता के 78 वर्षों के लंबे सफर के बाद भी देश की संवैधानिक और सामाजिक व्यवस्थाओं में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर विमर्श के केंद्र में है। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट और राष्ट्रीय हिन्दू जन कल्याण संघ ने अब इस विसंगति के विरुद्ध एक निर्णायक मोर्चा खोल दिया है। संस्था के प्रमुख डॉ. ऋषिपाल सिंह परमार ने वर्तमान आरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आजादी के बाद से अब तक के नियम-कानूनों में सवर्ण समाज की अनदेखी की गई है, जिससे एक बड़े वर्ग में असंतोष की लहर है।
डॉ. ऋषिपाल सिंह परमार का तर्क है कि 1947 से लागू प्रजातांत्रिक व्यवस्था में बनाए गए अधिकांश कानून जाति विशेष को ध्यान में रखकर तैयार किए गए, जिसका परिणाम यह हुआ कि सवर्ण समाज अनचाहे तौर पर इन नीतियों के निशाने पर रहा। उन्होंने राजनीतिक परिदृश्य पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक बार विधायक बनने वाला व्यक्ति अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुख-सुविधाओं का अंबार खड़ा कर लेता है, जबकि दूसरी ओर जातिगत आरक्षण का लाभ भी केवल उन गिने-चुने परिवारों तक सिमट कर रह गया है जो पहले से ही संपन्न हैं। ऊंचे शिक्षण संस्थानों और महंगी कोचिंग के दम पर आरक्षित वर्ग के रसूखदार परिवार ही बार-बार लाभ उठा रहे हैं, जिससे उसी वर्ग का वास्तविक गरीब और शोषित व्यक्ति 80 वर्षों बाद भी मुख्यधारा से कटा हुआ है।
बदलते समय की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए डॉ. परमार ने आह्वान किया है कि अब समय आ गया है जब आरक्षण की कसौटी 'जाति' नहीं बल्कि 'आर्थिक स्थिति' होनी चाहिए। उनका मानना है कि जब तक हर जाति के गरीब परिवार को संरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक समाज का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट और राष्ट्रीय हिन्दू जन कल्याण संघ ने अब राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाने का संकल्प लिया है। इस अभियान के माध्यम से देश भर के लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा ताकि शोषित और वंचित तबके के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार लाया जा सके। यह आंदोलन न केवल एक वैधानिक बदलाव की मांग है, बल्कि सामाजिक न्याय की परिभाषा को पुनर्जीवित करने का एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

Suresh Momiya, Jhalawar
नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय
परिचय
सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- दैनिक बढ़ता राजस्थान
- दैनिक कोटा ब्यूरो
- दैनिक दो गज दूरी
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
