गौमती सागर तालाब में मलबा डालने पर कांग्रेस पार्षदों का विरोध, छतरी का पूर्व स्वरूप बहाल करने की मांग
झालरापाटन के गौमती सागर तालाब में पुरानी छतरी को ध्वस्त कर मलबा डालने के मामले पर कांग्रेस पार्षदों ने विरोध जताया। जनधन के दुरुपयोग और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर उठे सवालों ने मामले को चर्चा का विषय बना दिया है।

झालावाड़ के गौमती सागर तालाब पर पुरानी छतरी ध्वस्त करने के विरोध में अधीक्षण अभियंता पी.सी. मीणा को वस्तुस्थिति से अवगत कराते पूर्व नेता प्रतिपक्ष मोहम्मद खालिद, चंद्रप्रकाश लाला राठौड़ एवं अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता।
ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व रखने वाले गौमती सागर तालाब में नगरपालिका द्वारा एक पुरानी छतरी को ध्वस्त कर उसका मलबा तालाब में डाले जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस पार्षदों एवं कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर नाराजगी जताई और इसे जनधन की बर्बादी तथा पर्यावरणीय दृष्टि से गंभीर लापरवाही बताया।
पूर्व पार्षद नेता प्रतिपक्ष मोहम्मद खालिद तथा पूर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष चंद्रप्रकाश लाला राठौड़ के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने गौमती सागर तालाब स्थित वॉकिंग ट्रैक का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नगरपालिका द्वारा रात्रि में एक पुरानी छतरी को ध्वस्त कर उसका मलबा तालाब में डलवाने के मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।
मौके पर नगरपालिका के अधीक्षण अभियंता पी.सी. मीणा को बुलाकर पार्षदों ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यदि छतरी क्षतिग्रस्त अवस्था में थी तो उसकी मरम्मत कर उसे संरक्षित किया जा सकता था, लेकिन बिना पर्याप्त कारण उसे तोड़कर पूरा मलबा तालाब में डाल दिया गया। पार्षदों ने इसे ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति उदासीनता का उदाहरण बताया।
अधीक्षण अभियंता द्वारा छतरी का पुनर्निर्माण करवाने की बात कही गई। इस पर कांग्रेस पार्षदों ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस संरचना की मरम्मत अपेक्षाकृत कम लागत में संभव थी, उसे ध्वस्त कर लाखों रुपये खर्च कर पुनर्निर्मित करना जनता के धन के दुरुपयोग जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने नगरपालिका से जनहित में उपलब्ध संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने की मांग की।
पार्षदों ने यह भी कहा कि पूर्व में गौमती सागर तालाब की सफाई और संरक्षण को लेकर नगरपालिका को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। इसके बावजूद तालाब में मलबा डलवाना गंभीर अनियमितता को दर्शाता है। उनका कहना था कि बरसात के मौसम में यह मलबा तालाब के जल को प्रदूषित कर सकता है तथा इसकी प्राकृतिक संरचना को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि गौमती सागर तालाब से क्षेत्रवासियों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्थाएं जुड़ी हुई हैं, इसलिए इसके संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं हो सकती।
कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगरपालिका द्वारा लघु श्रेणी के कार्यों के माध्यम से यह काम करवाया जा रहा है, जबकि आमजन से जुड़े छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए संबंधित ठेकेदार अक्सर बजट की कमी का हवाला देकर कार्य करने से इनकार कर देते हैं।
निरीक्षण के दौरान कांग्रेस पार्षदों एवं कार्यकर्ताओं ने मांग की कि ध्वस्त की गई छतरी का पूर्व स्वरूप शीघ्र बहाल किया जाए तथा तालाब में डाला गया समस्त मलबा बरसात से पहले तत्काल हटाया जाए। साथ ही वॉकिंग ट्रैक पर व्याप्त अव्यवस्थाओं को भी जल्द दूर करने की मांग की गई। उनका कहना था कि गौमती सागर तालाब को प्रदूषणमुक्त, सुरक्षित और संरक्षित बनाए रखना नगरपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष मोहम्मद खालिद, पूर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रप्रकाश लाला राठौड़, पार्षद नवीन मेघवाल, रिजवान हुसैन, मोहम्मद कासिम भट्टी, नरेंद्र राठौड़ (प्रिंस), बालचंद रावल सहित कांग्रेस के अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

Pratahkal Bureau
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