झालावाड़ में सूखा दिवस की उड़ी धज्जियां: कायदे-कानूनों को ठेंगा दिखाकर सजीं शराब और कबाब की महफिलें
झालावाड़ में संविधान दिवस पर 'सूखा दिवस' के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ीं। शराब की दुकानों पर ताले होने के बावजूद अवैध बिक्री जारी रही और ढाबों पर सरकारी कर्मचारियों की महफिलें सजी रहीं। मांस और मदिरा पर प्रतिबंध के बावजूद कानून का कोई खौफ नहीं दिखा। प्रशासन की अनदेखी के बीच नियम तोड़ने वालों ने जमकर व्यवस्था का मजाक बनाया।

झालावाड़। गणतंत्र दिवस और संविधान की मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए घोषित 'सूखा दिवस' झालावाड़ जिले में महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया। जब पूरा देश संविधान की गरिमा का उत्सव मना रहा था, तब जिले के कई इलाकों में कानून का खौफ नदारद दिखा और शराब व मांस के शौकीनों ने नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं। शहर से लेकर ढाबों तक का नजारा कुछ ऐसा था कि प्रशासन की मुस्तैदी पर सवालिया निशान खड़े हो गए।
26 जनवरी को संविधान दिवस के उपलक्ष्य में प्रशासन द्वारा मांस और मदिरा की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। आदेश के मुताबिक शराब की दुकानों पर ताले तो लटके रहे, लेकिन यह पाबंदी केवल दुकान के शटर तक ही सीमित नजर आई। हकीकत में, शराब ठेकों के बाहर का नजारा कुछ और ही बयां कर रहा था, जहां यथावत रूप से शराब की अवैध बिक्री का खेल चलता रहा। कानून की आंखों में धूल झोंककर 'जाम' छलकाए जा रहे थे और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे थे।
इससे भी चौंकाने वाला दृश्य जिले के ढाबों और होटलों पर देखने को मिला। 'सरकारी दामाद' कहे जाने वाले कई सरकारी कर्मचारी अपनी गरिमा को ताक पर रखकर ढाबों पर सजी महफिलों की रौनक बढ़ाते नजर आए। नियमों की पालना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर थी, उनमें से कुछ खुद इन महफिलों का हिस्सा बने हुए थे। कहीं कोई छापा नहीं पड़ा और न ही किसी प्रकार की सख्ती दिखाई गई, जिससे स्पष्ट था कि कानून का डर इन 'रसूखदारों' के मन से पूरी तरह खत्म हो चुका है।
यही हाल मांसाहार की दुकानों का भी रहा। कुछ दुकानदारों ने तो लोकलाज के चलते पर्दे की आड़ में बिक्री की, लेकिन कई स्थानों पर खुलेआम मांस बेचकर नियमों को चुनौती दी गई। मटन और चिकन के साथ गला तर करने वालों की भीड़ इस कदर उमड़ी कि ऐसा महसूस ही नहीं हुआ कि आज सूखा दिवस लागू है। प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरी अव्यवस्था के दौरान नदारद रहे, जिसका फायदा उठाकर नियम तोड़ने वालों ने जी भरकर कानून का मजाक उड़ाया। यह घटनाक्रम जिले में कानून के इकबाल और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है।

Suresh Momiya, Jhalawar
नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय
परिचय
सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- दैनिक बढ़ता राजस्थान
- दैनिक कोटा ब्यूरो
- दैनिक दो गज दूरी
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
