झालरापाटन: हिंदू धर्म की मान्यताओं में श्मशान भूमि को वैराग्य और जीवन का अंतिम सत्य माना जाता है, जहाँ देह त्यागने के बाद आत्मा की मुक्ति होती है। धर्मशास्त्रों में श्मशान की एक ईंट भी घर लाना महापाप माना गया है, लेकिन कलयुग का प्रभाव इतना गहरा गया है कि अब भ्रष्टाचार की दीमक ने इस पवित्र स्थल को भी नहीं छोड़ा। झालरापाटन क्षेत्र के सालरिया अंतर्गत काला कोट गांव में श्मशान भूमि विकास कार्यों के नाम पर एक बड़े घोटाले की बू आ रही है, जिसने प्रशासनिक मशीनरी और नैतिकता दोनों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

मामला सालरिया के काला कोट गांव का है, जहाँ तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी कमल किशोर पर विकास के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाने का गंभीर आरोप लगा है। स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, श्मशान घाट के निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए टाइट और अनटाइट फंड से लाखों रुपये आवंटित किए गए थे। उद्देश्य था कि अंतिम संस्कार के लिए आने वाले ग्रामीणों को सुविधा मिले, लेकिन आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी ने पद का दुरुपयोग करते हुए इस ‘मुक्ति स्थल’ को ही अपनी आय का जरिया बना लिया। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई, जबकि कागजों में लाखों के वारे-न्यारे कर दिए गए।

घोटाले की परतें तब उधड़नी शुरू हुईं जब निर्माण कार्य की गुणवत्ता और खर्च की गई राशि में भारी अंतर देखा गया। सूत्रों के मुताबिक, ‘देव नारायण कंस्ट्रक्शन’ नामक फर्म के नाम पर अलग-अलग तिथियों में कई बिल पास करवाए गए। रिकॉर्ड बताते हैं कि राजस्थान सरकार और भारत सरकार के सामान्य फंड से निर्माण सामग्री के नाम पर लगभग दस लाख रुपये खर्च दिखाए गए हैं, जबकि मजदूरी (लेबर) के पेटे दो से तीन लाख रुपये का भुगतान उठाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि धरातल पर हुआ कार्य इन आंकड़ों से कोसों दूर है। जिस फर्म के नाम पर पैसा उठाया गया, उसके द्वारा किए गए कार्य और बिलों की सत्यता संदेह के घेरे में है।

मौके की नजाकत और अधूरे पड़े कार्यों को देखकर स्थानीय निवासियों का अनुमान है कि इस पूरे प्रकरण में कम से कम पांच से छह लाख रुपये का सीधा गबन किया गया है। यह न केवल सरकारी धन की लूट है, बल्कि जनभावनाओं के साथ किया गया एक क्रूर मजाक भी है। श्मशान जैसी जगह, जहाँ इंसान सब कुछ छोड़कर जाता है, वहां से कुछ ‘पाने’ की लालसा ने प्रशासनिक नैतिकता को शर्मसार कर दिया है।

फिलहाल, गांव के जागरूक नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनकी मांग है कि निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन करवाया जाए और दोषी अधिकारियों से गबन की गई राशि की वसूली कर कानूनी कार्रवाई की जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ‘कलयुगी विकास’ की जांच कब शुरू करता है और क्या श्मशान के नाम पर डकारी गई राशि वापस सरकारी खजाने में लौट पाती है या नहीं।

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Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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