डग: गुराड़िया झाला ग्राम पंचायत में फर्जी हस्ताक्षरों से मस्टरोल जारी, भ्रष्टाचार का आरोप
ग्राम पंचायत सचिव के फर्जी हस्ताक्षर कर पांच विकास कार्यों की मस्टरोल जारी करने और मौके पर श्रमिक न मिलने का मामला सामने आया है।

झालावाड़ जिले की डग पंचायत समिति के अंतर्गत गुराड़िया झाला ग्राम पंचायत भवन, जहां विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगे हैं।
डग पंचायत समिति अंतर्गत ग्राम पंचायत गुराड़िया झाला में फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए मस्टरोल जारी कर विकास कार्यों में गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि ग्राम पंचायत सचिव के फर्जी साइन कर बिना उनकी जानकारी के मस्टरोल और कार्य स्वीकृत कर दिए गए, जबकि मौके पर कोई कार्य ही नहीं पाया गया।
मामले का खुलासा तब हुआ जब पंचायत समिति से मिली सूचना के आधार पर ग्राम पंचायत सचिव रजत लोधा मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि सेमली सरोत गांव में 18 की मस्टरोल पर लेबर मौजूद नहीं थी, वहीं माता जी के पास लगभग 78 मस्टरोल के आसपास श्रमिक दर्ज होने के बावजूद मौके पर स्थिति संदिग्ध मिली। पुलिया क्षेत्र में 42 श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज थी, लेकिन उनके पास औजार तक नहीं थे। निरीक्षण में कई कमियां पाई गईं।
सचिव रजत लोधा के अनुसार मियावाकी पौधरोपण कार्य (माता जी मंदिर के सामने) जिसकी स्वीकृत राशि 14.71 लाख रुपये है, ग्रेवल सड़क मय पुलिया निर्माण (13.07 लाख रुपये), नर्सरी विकास कार्य (6.98 लाख रुपये), चारागाह विकास एवं पौधरोपण (13.35 लाख रुपये) तथा एक अन्य ग्रेवल सड़क मय पुलिया निर्माण कार्य (12.98 लाख रुपये) सहित कुल पांच कार्य उनकी जानकारी के बिना स्वीकृत कर मस्टरोल जारी किए गए।
सचिव ने स्पष्ट किया कि उन्हें पंचायत समिति से सूचना मिलने के बाद ही इन मस्टरोल और कार्यों की जानकारी प्राप्त हुई, जबकि 11 से 25 तारीख के पखवाड़े में जारी किए गए कार्यों में उनके हस्ताक्षर पूर्व में उपयोग कर लिए गए थे। वहीं मौके पर इन कार्यों का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं पाया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस प्रकार की अनियमितताओं से मनरेगा एवं अन्य विकास योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास अधिकारी कंचन बोहरा के कार्यकाल में मनरेगा योजना में करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप पहले भी लगते रहे हैं।
विकास अधिकारी कंचन बोहरा ने कहा, “मैं चेक करवा कर उनकी अनुपस्थिति दर्ज करवाती हूं।” हालांकि मामले में अब तक किसी एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और जांच की मांग तेज हो गई है। यह पूरा प्रकरण पंचायत स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

Pratahkal Bureau
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