भवानीमण्डी शहर में एक तरफ जहां कड़ाके की ठंड के बीच लोग गरम पकवानों का आनंद ले रहे हैं, वहीं शुक्रवार को एक प्रतिष्ठित दुकान से खरीदा गया गाजर का हलवा आधा दर्जन लोगों के लिए जानलेवा मुसीबत बन गया। रेलवे स्टेशन तिराहे के पास स्थित 'जोधपुर कचौरी एवं मिष्ठान भण्डार' से हलवा खाने के बाद दो मासूम बच्चों सहित कुल छह लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बीती रात ही दुकान को सील कर दिया, हालांकि शनिवार को जब खाद्य निरीक्षक मौके पर पहुंचे तो दुकान से वह संदिग्ध हलवा ही गायब मिला, जिससे अब जांच की दिशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

घटनाक्रम के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी आईटी सेल के पूर्व सह संयोजक विष्णु शर्मा (30), निवासी पचपहाड़, शुक्रवार दोपहर करीब 3:30 बजे अपने पांच वर्षीय भतीजे भुवनेश और दो वर्षीय भतीजी भाविका के साथ मंडी आए थे। बच्चों की जिद पर उन्होंने जोधपुर मिष्ठान भंडार से 100 ग्राम गाजर का हलवा पैक करवाया। घर पहुंचने के करीब 15-20 मिनट बाद तीनों ने वह हलवा खाया। विष्णु शर्मा जब अपनी मोबाइल की दुकान पर पहुंचे, तो उन्हें घबराहट महसूस होने लगी। शुरुआती दौर में उन्होंने इसे सामान्य गैस की समस्या समझकर दवा ली, लेकिन कुछ ही देर में उन्हें तेज उल्टियां शुरू हो गई। घर पहुंचने पर पता चला कि नन्हे भुवनेश और भाविका की हालत भी नाजुक बनी हुई है। आनन-फानन में बच्चों को शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले जाया गया, लेकिन सुधार न होने पर उन्हें रात में ही निजी मेट्रो अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जबकि विष्णु शर्मा स्वयं राजकीय उप जिला चिकित्सालय में उपचाराधीन हैं। हृदय विदारक बात यह है कि शनिवार को मासूम भाविका का दूसरा जन्मदिन था, लेकिन जश्न की जगह परिवार अस्पताल के गलियारों में दुआएं मांगता नजर आया।

प्रशासनिक स्तर पर खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका अब संदेह के घेरे में है। झालावाड़ से आए फूड इंस्पेक्टर भूराराम गोदारा जब शनिवार सुबह सैंपल लेने पहुंचे, तो उन्हें दुकान के स्टॉक में गाजर का हलवा उपलब्ध नहीं मिला। हालांकि, गोदारा ने बताया कि किसी व्यक्ति ने उन्हें उसी दुकान से खरीदा गया कुछ मात्रा में हलवा उपलब्ध कराया है, जिसे अन्य मिठाइयों के नमूनों के साथ लैब भेजा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर, दुकान मालिक जालमसिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक इत्तेफाक बताया है। जालमसिंह का कहना है कि उन्होंने शिकायत मिलने पर खुद पचपहाड़ से आए लोगों के सामने वही हलवा खाकर देखा था और उन्हें उसमें कोई खराबी महसूस नहीं हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस दिन अन्य ग्राहकों ने भी वही हलवा खरीदा था, लेकिन कहीं से कोई शिकायत नहीं आई। फिलहाल, सभी बीमारों की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है, लेकिन इस घटना ने शहर के खाद्य प्रतिष्ठानों की स्वच्छता और गुणवत्ता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

Suresh Momiya, Jhalawar

Suresh Momiya, Jhalawar

नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)

वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय


परिचय

सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव 

पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • दैनिक बढ़ता राजस्थान
  • दैनिक कोटा ब्यूरो
  • दैनिक दो गज दूरी

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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