भालता कस्बे में सोमवार को तब हालात तनावपूर्ण हो गए जब नृसिंह मंदिर परिसर की दुकानों पर कथित अवैध कब्जे के विरोध में ग्रामीणों और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर कस्बा बंद का आह्वान किया। सुबह से ही बाजारों के शटर बंद रहे और बस स्टैंड क्षेत्र में भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां लोगों ने प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की।

नृसिंह भगवान के प्राचीन मंदिर के आसपास बस स्टैंड क्षेत्र में करीब चालीस दुकानें मंदिर समिति द्वारा निर्मित हैं, जिन्हें किराये से स्थानीय व्यापारियों को दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, इन्हीं दुकानों में से दो दुकानें फूलसिंह गुर्जर द्वारा किराये पर ली गई थीं, लेकिन वर्षों से उनका किराया समिति को जमा नहीं करवाया गया। इस बीच मंदिर का नवनिर्माण कार्य चल रहा है, जिसके दौरान दुकानों से जुड़े विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि फूलसिंह गुर्जर ने अपनी पत्नी के भालता ग्राम पंचायत की वर्तमान सरपंच एवं प्रशासक होने के पद का दुरुपयोग करते हुए मंदिर समिति की दुकानों के अवैध पट्टे जारी करवाए और उन्हें अपने कब्जे में ले लिया। इसी कथित शक्ति-समीकरण ने स्थानीय लोगों में नाराजगी को और भड़का दिया, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक रोष फैल गया।

हिंदू समाज और क्षेत्रवासियों ने संयुक्त रूप से प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कथित कब्जा हटाने, पट्टों की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने साफ कहा कि मंदिर की संपत्ति पर किसी भी प्रकार का राजनीतिक या व्यक्तिगत हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कस्बे में देर शाम तक स्थिति शांतिपूर्ण रही, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उचित कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। प्रशासन की ओर से मामले की जांच किए जाने की पुष्टि हुई है और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

Pratahkal Bureau

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