झालावाड़। जिले की ग्राम सेवा सहकारी समितियों में करोड़ों रुपये के खाद घोटाले का मामला अब भी तह तक नहीं पहुंच पाया है। मामला तब का है जब झालावाड़ केंद्रीय सहकारी बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक राय सिंह मोजावत के कार्यकाल (30 जुलाई 2014 से 23 अगस्त 2017) में राजफेड से गैर-अनुमोदित निजी कंपनियों की फोम जैविक खाद (सल्फर धार यूरिया) जबरन समितियों में डलवाई गई। इस प्रक्रिया में बैंक और समितियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, जबकि जांच अब तक लंबित है।

18 जनवरी 2022 को एक आरटीआई कार्यकर्ता ने मुख्य प्रबंधक नाबार्ड जयपुर, रजिस्ट्रार सहकारी समितियां राजस्थान जयपुर और प्रबंध संचालक राजस्थान राज्य सहकारी क्रय-विक्रय संघ लिमिटेड जयपुर को इस घोटाले की जांच कराने हेतु पत्र भेजा। प्रबंध संचालक ने 11 फरवरी 2022 को संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि झालावाड़ जिले की समितियों में डलवाई गई फोम जैविक खाद की विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

हालांकि सहकारी विभाग ने जांच के लिए एक अधिकारी को नियुक्त किया, लेकिन तत्कालीन प्रबंध निदेशक के प्रभाव के कारण बैंक और उप-रजिस्ट्रार कार्यालय झालावाड़ से कोई सूचना नहीं प्राप्त हुई। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद, शिकायत पर पुनः कार्रवाई शुरू हुई और 12 जून 2024 को तकनीकी सहायक रजिस्ट्रार ने अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारी समितियां कोटा खंड कोटा को जांच के आदेश दिए। जांच अधिकारी नरेंद्र सिंह विष्ट ने 8 अगस्त 2024 को कानून का हवाला देते हुए जांच संबंधित जिले के अधिकारी स्तर से संपादित कराने का प्रस्ताव दिया, जिससे फाइल लंबे समय तक दबी रही।

7 अक्टूबर 2024 को सहकारिता मंत्री की बैठक में मामले को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद अतिरिक्त रजिस्ट्रार ने 21 अक्टूबर 2024 को उप-रजिस्ट्रार झालावाड़ को सभी पत्र भेजते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद, जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है।

अधिकारियों के दबाव और पूर्व प्रबंध निदेशक के अनुयायियों की मौजूदगी के कारण, झालावाड़ केंद्रीय सहकारी बैंक और उप-रजिस्ट्रार कार्यालय में निष्पक्ष जांच करना कठिन साबित हो रहा है। आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा मई 2025 में भेजे गए पत्र में भी फर्म को भुगतान, समितियों की भूमिका और शाखा प्रबंधकों की सहमति की जांच की मांग की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष रूप से जयपुर से टीम भेजकर कराई जाए, तो घोटाले में शामिल सभी पक्षों की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी और भविष्य में बैंक के किसी भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा निजी फर्मों के माध्यम से अनधिकृत दबाव डालने की घटनाओं पर रोक लगेगी।

झालावाड़ जिले में इस घोटाले की गूंज सहकारी क्षेत्र में व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है, और राज्य सरकार पर गंभीर कार्रवाई की सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी बढ़ती जा रही है।

Suresh Momiya, Jhalawar

Suresh Momiya, Jhalawar

नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)

वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय


परिचय

सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव 

पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • दैनिक बढ़ता राजस्थान
  • दैनिक कोटा ब्यूरो
  • दैनिक दो गज दूरी

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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