राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर झालावाड़ में सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन
झालावाड़ में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन हुआ। नृत्य, संगीत और देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

झालावाड़, 9 नवम्बर। राष्ट्रभावना और सांस्कृतिक गौरव से ओतप्रोत वातावरण में शनिवार शाम झालावाड़ के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ। यह आयोजन जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, पर्यटन विभाग एवं उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसने उपस्थित दर्शकों में देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का भाव जागृत कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत नन्ही बालिका अनाहिता शर्मा के मनमोहक एकल नृत्य से हुई, जिनकी प्रस्तुति ने दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंजा दिया। इसके पश्चात राबाउमावि मंगलपुरा की छात्राओं ने ‘केसरिया बालम धरती धोरारी’ गीत पर पारंपरिक राजस्थानी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी, जिसने स्थानीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत की।
देशभक्ति के रंग में डूबी बालिका आयुषी सुमन ने ‘तिरंगे में बसती है जान’ गीत पर एकल नृत्य प्रस्तुत कर माहौल को भावनाओं से भर दिया। ब्लोसम पब्लिक स्कूल के बच्चों ने पंजाबी भांगड़ा और गिद्धा नृत्य से उत्साह का संचार किया, जबकि अंतिमा कुमारी ने ‘देश रंगीला’ गीत पर शानदार एकल नृत्य कर दर्शकों की तालियां बटोरीं।
पीजी कॉलेज की छात्राओं ने कालबेलिया नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति देकर राजस्थान की लोकसंस्कृति को मंच पर साकार किया। इसी क्रम में डॉ. अशोक शर्मा ने अपनी बांसुरी की मधुर धुनों पर ‘ए मेरे वतन के लोगों’ गीत बजाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
महारानी बृजकुवंर राबाउमावि झालावाड़ की छात्राओं ने युगल नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी, जबकि सेंट जॉसेफ इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित समूह नृत्य से देश की वीर नारियों को नमन किया। मॉर्डन एजुकेशन स्कूल की छात्रा आयशा खान ने ‘हमें देखनी है आज़ादी’ गीत पर अपने जोशपूर्ण एकल नृत्य से स्वतंत्रता के अमर भाव को व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के अधिकारीगण, पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक सिराज कुरैशी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन नरेंद्र दूबे ने किया।
यह सांस्कृतिक संध्या न केवल ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्षों की गौरवगाथा का उत्सव थी, बल्कि राष्ट्रप्रेम, संस्कृति और कला के समन्वय का सशक्त उदाहरण भी बनी।
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Pratahkal Bureau
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