झालावाड़ जिले की सुनेल पंचायत समिति में पंचायती राज विभाग के कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत समिति के विकास अधिकारी संजय शर्मा ने नियमों को ताक पर रखकर ग्राम पंचायत खैराना में सरपंच पुत्र दिनेश दांगी को सामग्री सप्लाई का टेंडर जारी कर दिया। मामले को लेकर पंचायत समिति में भ्रष्टाचार, फर्जी बिल और राजकोष को नुकसान पहुंचाने के आरोपों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार पंचायत समिति सुनेल की ग्राम पंचायतों में सामग्री सप्लाई टेंडरों को लेकर लंबे समय से अनियमितताओं का खेल चल रहा है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामग्री सप्लाई टेंडर की कीमत करीब एक लाख रुपए निर्धारित है। पंचायत समिति क्षेत्र की 44 ग्राम पंचायतों में प्रतिवर्ष लगभग 44 लाख रुपए का खेल होने की चर्चा है। आरोप है कि कई सरपंचों के पास दूसरी ग्राम पंचायतों के टेंडर हैं, जबकि नियमानुसार कोई भी सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी अथवा उनके परिवार का सदस्य अपनी या किसी दूसरी ग्राम पंचायत का टेंडर नहीं ले सकता।

जानकारी के अनुसार पंचायत समिति स्तर पर टेंडरों की जांच-पड़ताल और प्रक्रिया पूरी कर उन्हें खोलने का स्पष्ट प्रावधान है। इसके बावजूद ग्राम पंचायत खैराना में सरपंच के पुत्र दिनेश दांगी को सामग्री सप्लाई का टेंडर दिए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि दिनेश दांगी की मां वर्तमान में सरपंच हैं और संबंधित बिलों में दिनेश दांगी के हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर दर्ज हैं। इससे हितों के टकराव और नियम विरुद्ध प्रक्रिया अपनाने के आरोप और गहरे हो गए हैं।

मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए गए बिलों में सामग्री का विवरण नहीं है। बिलों पर सरपंच और सचिव के हस्ताक्षर तथा मोहर भी नहीं पाए गए। इसके बावजूद करीब एक लाख पच्चीस हजार रुपए की राशि बिना सामग्री खरीद के एडवांस में चढ़ा दी गई। आरोपों के घेरे में ग्राम विकास अधिकारी की भूमिका भी बताई जा रही है, क्योंकि संबंधित फर्जी बिल ऑनलाइन साइट पर अपलोड किए गए हैं।

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि विकास अधिकारी संजय शर्मा स्वयं को प्रभावशाली राजनीतिक पहुंच वाला बताते रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि वे पहले भाजपा नेता से रिश्तेदारी का हवाला देकर प्रभाव जमाते थे और अब जयपुर तक पहुंच होने की बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पूरे मामले ने पंचायत समिति सुनेल की कार्यप्रणाली और पंचायती राज विभाग में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है। यदि आरोपों की जांच होती है तो सामग्री सप्लाई टेंडरों, फर्जी बिलों और पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कई और तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। पंचायत राज व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

Updated On
Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story