नर्सिंग अधिकारी तेजाराम परिहार ने एसडीपी रक्तदान कर बचाई जान
मथुरादास माथुर अस्पताल में नर्सिंग अधिकारी तेजाराम परिहार ने ड्यूटी के दौरान ए पॉजिटिव एसडीपी रक्तदान कर गंभीर महिला मरीज का उपचार संभव बनाया।

जोधपुर में मानवता की मिसाल, गंभीर महिला मरीज को समय पर मिला ए पॉजिटिव एसडीपी रक्त
जोधपुर में चिकित्सा सेवा और मानवता का अद्भुत उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब मथुरादास माथुर अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग अधिकारी तेजाराम परिहार मोखेरी ने ड्यूटी के दौरान चौथी बार एसडीपी रक्तदान कर एक गंभीर महिला मरीज की जान बचाई। उनके इस मानवीय प्रयास ने अस्पताल परिसर सहित सामाजिक संगठनों और आमजन के बीच गहरी सराहना हासिल की है।
जानकारी के अनुसार मनोहर लाल राठौड़ ने बताया कि फलोदी जिले के मलार रिन निवासी निरमा पत्नी वासुदेव पंवार अत्यधिक रक्तस्राव की गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल फलोदी से रेफर होकर मथुरादास माथुर अस्पताल पहुंचीं। महिला की हालत अत्यंत नाजुक थी। चिकित्सकों ने तत्काल एसडीपी रक्त की आवश्यकता बताई। ऐसे संकटपूर्ण समय में नर्सिंग अधिकारी तेजाराम परिहार ने बिना देरी किए स्वयं आगे आकर ए पॉजिटिव एसडीपी रक्तदान किया। समय पर रक्त उपलब्ध होने से महिला का उपचार संभव हो सका और उसकी जान बचाई जा सकी।
मरीज के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि कठिन समय में तेजाराम परिहार उनके लिए भगवान बनकर सामने आए। उन्होंने केवल रक्तदान ही नहीं किया, बल्कि पूरे परिवार को नई उम्मीद और जीवन दिया है।
नर्सिंग अधिकारी तेजाराम परिहार लंबे समय से समाज सेवा और रक्तदान अभियान से जुड़े हुए हैं। वे जगमालाराम परिहार के पुत्र तथा भानु सेवा संस्थान फलोदी के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। जरूरतमंद मरीजों के लिए वे लगातार रक्तदान करते आ रहे हैं। अब तक वे कुल 18 बार रक्तदान कर चुके हैं, जिनमें 14 बार पीआरबीसी और 4 बार एसडीपी रक्तदान शामिल है। विशेष बात यह रही कि आपातकालीन परिस्थितियों में ड्यूटी के दौरान यह उनका चौथा एसडीपी रक्तदान था।
तेजाराम परिहार ने कहा कि रक्तदान केवल सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि जरूरतमंद को नया जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति नियमित रूप से रक्तदान करने का संकल्प ले, तो रक्त की कमी के कारण किसी मरीज की जान नहीं जाएगी।
भानु सेवा संस्थान के संरक्षक दमाराम गोगली ने रक्तवीर तेजाराम परिहार का आभार जताते हुए कहा कि वर्तमान समय में जहां अधिकांश लोग अपने निजी जीवन तक सीमित रहते हैं, वहीं तेजाराम परिहार जैसे स्वास्थ्यकर्मी अपने कर्तव्य के साथ मानव सेवा को सर्वोपरि रखकर समाज को नई दिशा दे रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार एक यूनिट रक्त कई मरीजों का जीवन बचा सकता है, लेकिन आज भी अनेक अस्पतालों में समय पर रक्त उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में तेजाराम परिहार जैसे प्रेरणादायी व्यक्तित्व समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं।
नर्सिंग अधिकारी तेजाराम परिहार का यह मानवीय प्रयास न केवल चिकित्सा जगत, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा और गर्व का विषय बन गया है। उनका सेवा भाव, समर्पण और संवेदनशीलता निश्चित रूप से युवाओं और

