लौद्रवा धाम में संत श्री गरवाजी महाराज की जीवनी का विमोचन, स्वर्गीय मंगलाराम मंगल की अंतिम साहित्यिक धरोहर समाज को समर्पित
जैसलमेर के लौद्रवा धाम में संत श्री गरवाजी महाराज की जीवनी के द्वितीय संस्करण का विमोचन हुआ। स्वर्गीय मंगलाराम मंगल की अंतिम साहित्यिक धरोहर समाज को समर्पित की गई।

लौद्रवा में आयोजित समारोह में मंच पर उपस्थित कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत, विधायक रविन्द्र सिंह भाटी, संत-महात्मा और अन्य अतिथि स्वर्गीय मंगलाराम मंगल द्वारा लिखित पुस्तक 'संत शिरोमणि श्री गरवाजी महाराज' का विमोचन करते हुए।
लौद्रवा धाम में आयोजित अखिल भारतीय कुमावत संत श्री गरवाजी सेवा समिति के तत्वावधान में संत शिरोमणि श्री गरवाजी महाराज के वार्षिक मेला एवं सामाजिक सम्मेलन के दौरान एक ऐतिहासिक क्षण उस समय सामने आया, जब स्वर्गीय शिक्षा अधिकारी मंगलाराम मंगल द्वारा लिखित पुस्तक "संत शिरोमणि श्री गरवाजी महाराज" के द्वितीय संस्करण का संत-महात्माओं एवं विशिष्ट अतिथियों के करकमलों से विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर का साक्षी हजारों समाजबंधु बने।
पुस्तक विमोचन समारोह में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद राय टाक, विधायक छोटूसिंह भाटी, विधायक रविन्द्र सिंह भाटी, संत श्री कमलेशानन्द भारती महाराज, श्री गोविन्द वल्लभदास महाराज सहित अनेक संत-महात्मा एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। समारोह के दौरान पुस्तक के द्वितीय संस्करण को समाज के लिए समर्पित किया गया।
बताया गया कि स्वर्गीय मंगलाराम मंगल, जो शिक्षा विभाग में शिक्षा अधिकारी रहे, ने अपने जीवनकाल में शिक्षा के प्रचार-प्रसार, समाज जागरण तथा संत श्री गरवाजी महाराज के जीवन-दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस पुस्तक का लेखन किया था। उन्होंने अपने सेवाकाल में अनेक विद्यार्थियों, युवाओं और समाज के लोगों को शिक्षा एवं संस्कारों के प्रति प्रेरित किया। उनके निधन के बाद परिवारजनों एवं समाज के सहयोग से पुस्तक का द्वितीय संस्करण प्रकाशित कर समाज को समर्पित किया गया।
समिति ने घोषणा की कि यह पुस्तक श्री गरवाजी धाम, लौद्रवा में उपलब्ध रहेगी तथा समाजबंधुओं और श्रद्धालुओं को निःशुल्क वितरित की जाएगी। जो भी श्रद्धालु या समाजजन इस पुस्तक को प्राप्त करना चाहते हैं, वे गरवाजी धाम से इसे निःशुल्क प्राप्त कर सकेंगे।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक केवल संत श्री गरवाजी महाराज की जीवनी नहीं, बल्कि उनके आदर्शों, समाज सुधार, आध्यात्मिक विचारों और प्रेरणादायी जीवन का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि यह कृति आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, संत परंपरा और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पुस्तक विमोचन समारोह ने पूरे सम्मेलन को एक विशेष ऐतिहासिक पहचान प्रदान की, वहीं उपस्थित जनसमूह ने स्वर्गीय मंगलाराम मंगल के शिक्षा और समाज सेवा के योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि के साथ स्मरण किया।

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