जैसलमेर जिले के देवा गांव से पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां एक नवविवाहित दंपति ने अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत पौधरोपण के साथ कर समाज को हरित भविष्य का संदेश दिया। बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य, बढ़ते तापमान और जल संकट जैसी चुनौतियों के बीच इस पहल ने विवाह जैसे पारंपरिक उत्सव को प्रकृति संरक्षण और सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए नई दिशा दी।

देवा निवासी प्रागाराम पंवार के पुत्र दिनेश कुमार और उनकी धर्मपत्नी कृष्णा ने विवाह उपलक्ष्य में भीमराव अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संचालित अंबेडकर पार्क में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। नवदंपति ने कहा कि जीवन के महत्वपूर्ण अवसर केवल उत्सव और परंपराओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें समाज और प्रकृति के हित में भी समर्पित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने विवाह, जन्मदिन, वर्षगांठ अथवा अन्य विशेष अवसरों पर एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरित वातावरण प्रदान किया जा सकता है। उनकी इस पहल ने उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक और प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों, युवाओं, समाजसेवियों और गणमान्य नागरिकों ने नवदंपति की पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए अनुकरणीय कदम बताया। इस अवसर पर उदयपुरवाटी एडीएम सुमन सोनल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि पौधरोपण जैसे छोटे प्रयास भी भविष्य को सुरक्षित और संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि पहली बार अंबेडकर पार्क पहुंचे इंडियन बैंक झुंझुनूं के बैंक मैनेजर अरविंद बालोच और उनकी धर्मपत्नी एडीएम सुमन सोनल ने भी पौधरोपण कर अभियान में सहभागिता निभाई। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर भी सोसाइटी को भेंट की तथा सामाजिक समरसता, शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा देने का संदेश दिया।

भीमराव अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी देवा द्वारा लगातार किए जा रहे सामाजिक, शैक्षिक और पर्यावरणीय कार्यों की भी उपस्थित लोगों ने सराहना की। समाजसेवी किशोर जयपाल ने कहा कि सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है, जब युवा वर्ग सामाजिक जिम्मेदारियों को समझते हुए प्रकृति संरक्षण और मानव सेवा से जुड़े।

पूरा कार्यक्रम सामाजिक एकता, पर्यावरण प्रेम और जनजागरूकता का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया। अंत में उपस्थित सभी लोगों ने “एक पौधा — आने वाली पीढ़ियों के नाम” का संदेश देते हुए पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।

देवा गांव की यह पहल न केवल ग्रामीण क्षेत्र में जागरूकता का प्रतीक बनी, बल्कि युवाओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी साबित हुई। इस आयोजन ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि नई जिंदगी की शुरुआत प्रकृति संरक्षण और सामाजिक सरोकारों के संकल्प के साथ हो, तो समाज और पर्यावरण दोनों का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बनाया जा सकता है।

Pratahkal Bureau

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