राजस्थान की राजनीति में सोमवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। वर्ष 1994 से लंबित यमुना जल समझौता आखिरकार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में साकार हो गया। राज्य सरकार ने इसे 32 वर्षों की कांग्रेस सरकारों की विफलता पर निर्णायक उपलब्धि बताते हुए कहा कि जिस जल अधिकार को छह कांग्रेस सरकारें और केंद्र में कांग्रेस का एक दशक का शासन भी सुनिश्चित नहीं कर सका, उसे भाजपा सरकार ने ढाई वर्षों के सतत प्रयासों से हासिल करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता दिलाई है।

वर्ष 1994 में यमुना जल बंटवारे का समझौता हुआ था, लेकिन राजस्थान को उसका वैधानिक अधिकार कभी नहीं मिल सका। इस दौरान प्रदेश में कांग्रेस और अन्य दलों की कई सरकारें बनीं, जबकि केंद्र में भी कांग्रेस ने एक दशक तक शासन किया। इसके बावजूद राजस्थान के हिस्से का पानी दिलाने के लिए न गंभीर वार्ता हुई, न राजनीतिक दबाव बनाया गया और न ही कोई ठोस परिणाम सामने आया। राज्य सरकार का कहना है कि कांग्रेस ने शेखावाटी की प्यास को केवल चुनावी मुद्दा बनाया, लेकिन समाधान का संकल्प नहीं लिया।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सत्ता संभालने के बाद स्पष्ट किया कि राजस्थान के हितों से कोई समझौता नहीं होगा। पिछले ढाई वर्षों में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी.आर. पाटिल तथा हरियाणा सरकार के साथ लगातार संवाद स्थापित किया। सरकार के अनुसार, इसी समन्वित प्रयास के परिणामस्वरूप वर्षों से रुकी प्रक्रिया आगे बढ़ी और राजस्थान को उसके अधिकार की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली।

समझौते के तहत 1917 क्यूसेक यमुना जल उपलब्ध कराने तथा लगभग 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से जलापूर्ति की व्यवस्था प्रस्तावित है। सरकार का कहना है कि इससे शेखावाटी के झुंझुनूं, सीकर, चूरू सहित अनेक क्षेत्रों में पेयजल संकट कम होगा, भूजल पर निर्भरता घटेगी, गिरते जलस्तर को संभालने में सहायता मिलेगी, किसानों को राहत मिलेगी, उद्योगों के लिए पानी उपलब्ध होगा तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। वर्षों से टैंकरों और गहराते भूजल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए इसे जीवन बदलने वाला निर्णय बताया गया है।

राज्य सरकार ने इस उपलब्धि के साथ कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। सरकार के अनुसार, 32 वर्षों तक राजस्थान का जल अधिकार केवल भाषणों तक सीमित रहा। हर चुनाव में शेखावाटी के नाम पर वोट मांगे गए, लेकिन दिल्ली और हरियाणा के समक्ष राजस्थान का पक्ष मजबूती से नहीं रखा गया।

सरकार ने यह भी कहा कि हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के घोषणा-पत्र में राजस्थान को यमुना का एक बूंद पानी तक नहीं देने का वादा किया गया था। इसे राजस्थान के स्वाभिमान और करोड़ों लोगों की प्यास के साथ राजनीतिक खिलवाड़ बताते हुए सरकार ने आरोप लगाया कि उस समय शेखावाटी और राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरियाणा में कांग्रेस के पक्ष में चुनाव प्रचार करते रहे, लेकिन किसी ने भी राजस्थान के जल अधिकारों की रक्षा के लिए सार्वजनिक रूप से आवाज नहीं उठाई। सरकार के अनुसार, यह कांग्रेस की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

इसके विपरीत भाजपा सरकार ने दावा किया कि उसने टकराव के बजाय सहकारी संघवाद की भावना के साथ संवाद, विश्वास और परिणाम का मार्ग अपनाया। सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह साबित किया कि मजबूत नेतृत्व केवल घोषणाएं नहीं करता, बल्कि दशकों से लंबित मामलों को समाधान तक पहुंचाता है।

राज्य सरकार ने इस समझौते को राजनीति बनाम परिणाम का उदाहरण बताते हुए कहा कि एक ओर कांग्रेस की दशकों पुरानी वादाखिलाफी रही, जबकि दूसरी ओर भाजपा सरकार ने परिणाम आधारित सुशासन का परिचय दिया। सरकार का दावा है कि कांग्रेस ने 32 वर्षों तक केवल वादे किए, जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ढाई वर्षों के निरंतर प्रयासों से समाधान दिया। सरकार के अनुसार, कांग्रेस ने राजनीति की, जबकि भाजपा सरकार ने परिणाम दिए।

सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह भी सिद्ध किया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति ही सबसे बड़ी प्रशासनिक शक्ति होती है। स्पष्ट दृष्टि, निर्णय लेने का साहस और जनता के प्रति प्रतिबद्धता के बल पर दशकों पुराने विवाद भी सुलझाए जा सकते हैं।

राज्य सरकार के अनुसार, यमुना जल समझौता केवल शेखावाटी की प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि राजस्थान को जल-सुरक्षित बनाने की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण आधार है। इससे राज्य के आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश, कृषि उत्पादकता, शहरी विस्तार और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य को मजबूती मिलेगी। सरकार ने कहा कि यह समझौता केवल एक हस्ताक्षर नहीं, बल्कि निर्णायक नेतृत्व, स्पष्ट नीयत और अटल संकल्प से इतिहास बदलने का प्रमाण है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story