जयपुर, 6 सितंबर। यादव समाज में सकारात्मक सोच, संस्कार, एकता और सेवा की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रविवार को वैशाली नगर स्थित प्रभु निधि सभागार, ब्रह्माकुमारीज में ‘संस्कार परिवर्तन द्वारा स्वर्णिम संसार’ विषय पर संस्कार संगोष्ठी आयोजित हुई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सामाजिक बदलाव की शुरुआत व्यक्ति के विचार, व्यवहार और संस्कारों से करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. जी.एल. यादव ने बताया कि संगोष्ठी की मुख्य अतिथि ब्रह्माकुमारी सुषमा दीदी रहीं। कार्यक्रम में चंद्रकला दीदी, एकता बहन, कोमल यादव, डॉ. करण सिंह यादव, हरसाहाय यादव, डॉ. रामगोपाल यादव, सुरेश यादव, तेजपाल यादव और जाहर यादव गुजरात की सहित समाज के गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और मातृशक्ति मौजूद रही।

अपने उद्बोधन में सुषमा दीदी ने कहा कि समाज में स्थायी बदलाव बाहरी व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि व्यक्ति के विचार, व्यवहार और संस्कारों में परिवर्तन से आता है। एक व्यक्ति अच्छे संस्कार और सकारात्मक सोच अपनाता है तो उसका प्रभाव परिवार पर पड़ता है। परिवार में बदलाव आने के बाद यही सकारात्मक ऊर्जा समाज को नई दिशा देती है। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करने की जरूरत है।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. जी.एल. यादव ने कहा, “एक व्यक्ति के संस्कार बदलेंगे तो परिवार बदलेगा, परिवार बदलेगा तो समाज बदलेगा और समाज बदलेगा तो स्वर्णिम संसार का निर्माण होगा।” उन्होंने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि अच्छे संस्कारों को व्यवहार में उतारकर समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत करना है।

संगोष्ठी के दौरान समाजबंधुओं ने प्रेम, सम्मान, एकता, सेवा और सकारात्मक सोच को जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। आयोजकों ने बताया कि समाज में संस्कार और सकारात्मक परिवर्तन को लेकर ऐसे कार्यक्रम आगे भी आयोजित किए जाएंगे। संगोष्ठी में व्यक्ति से परिवार और परिवार से समाज तक सकारात्मक बदलाव की दिशा में संस्कारों की भूमिका को केंद्र में रखा गया।

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