पशु स्वास्थ्य और पशुपालन क्षेत्र की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए राजुवास (जोबनेर) जयपुर द्वारा स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पी.जी.आई.वी.ई.आर.), जयपुर में शनिवार को “विश्व पशुचिकित्सा दिवस-2026” का आयोजन किया गया, जिसमें पशु चिकित्सा सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और नवाचार की दिशा में ठोस पहल पर बल दिया गया।

संस्थान के अधिष्ठाता एवं फैकल्टी चेयरमेन प्रो. (डॉ.) धर्म सिंह मीना ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्व पशुचिकित्सा दिवस की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पशुपालन, डेयरी, गोपालन एवं देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार के केबिनेट मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने अपने संबोधन में कहा कि यह दिवस पशुचिकित्सकों के योगदान को स्मरण करने और पशुधन के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पशुचिकित्सा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देकर पशुपालन और चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाना आवश्यक है, क्योंकि पशुओं को बीमारियों से सुरक्षित रखकर मानव स्वास्थ्य की भी रक्षा की जा सकती है।

उन्होंने राज्य सरकार द्वारा पशुचिकित्सा क्षेत्र में किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि नए पशुचिकित्सालय खोले गए हैं, कई संस्थानों का क्रमोन्नयन किया गया है, निःशुल्क दवाओं की संख्या बढ़ाई गई है और उनकी उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही पशुपालकों तक घर-घर चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के लिए मोबाइल वेटनरी वैन, गोपालक कार्ड, मंगला पशु बीमा योजना और सेक्स सॉर्टेड सीमन जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पशु टीकाकरण कार्यक्रम को भी प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है ताकि बीमारियों की रोकथाम सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि पशुओं को बेहतर चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना सरकार का लक्ष्य है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में 70 प्रतिशत से अधिक लोगों की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. (डॉ.) त्रिभुवन शर्मा, कुलपति रूवास (जोबनेर) जयपुर ने पशुपालन के आर्थिक और पोषण संबंधी महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था और पोषण सुरक्षा में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि पशु स्वास्थ्य के साथ-साथ पशु उत्पादन पर भी ध्यान देना आवश्यक है, जिससे पशुपालकों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में पशुपालन की भूमिका सशक्त हो।

विशिष्ट अतिथि पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. सुरेश चंद मीना ने कहा कि पशुचिकित्सक केवल पशुओं का उपचार ही नहीं करता, बल्कि मानव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) धर्म सिंह मीना ने पशुचिकित्सा के इतिहास और वर्तमान पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पशुपालकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम के दौरान दो सेवानिवृत्त आचार्य प्रो. (डॉ.) जी.सी. गहलोत और प्रो. (डॉ.) सुनन्दा शर्मा को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया तथा रूवास की न्यूज लेटर का विमोचन भी किया गया। तकनीकी सत्र में डॉ. एस.के. झीरवाल ने इस वर्ष की थीम “पशुचिकित्सक- भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक” पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोनिका करनानी ने किया, जबकि कुलसचिव एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी श्री सावन कुमार चायल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन सहायक अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. निर्मल कुमार जेफ की देखरेख में संपन्न हुआ।

इसी क्रम में पशुचिकित्सा संकुल द्वारा विश्व पशुचिकित्सा दिवस के उपलक्ष्य में निःशुल्क एंटी रैबीज टीकाकरण एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविर तथा पशु बांझपन निवारण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पशुपालकों ने भाग लेकर लाभ उठाया। विद्यार्थियों के लिए पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई और पशु जन्य रोग निदान, निगरानी एवं निवारण केन्द्र (सी.डी.एस.आर.जेड.) द्वारा ऑनलाइन क्विज का भी आयोजन किया गया। यह आयोजन पशु स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में उभरा।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story