जयपुर के एमपीएस इंटरनेशनल स्कूल में पॉक्सो एक्ट पर कार्यशाला: बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों को किया गया जागरूक
जयपुर के एमपीएस इंटरनेशनल स्कूल में पॉक्सो एक्ट और साइबर बुलिंग पर आयोजित विशेष कार्यशाला में एडवोकेट राधिका माहेश्वरी और नीतिका कलाकार ने शिक्षकों को कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। विद्यालय सचिव राधामोहन कचोलिया और प्राचार्या मंजू शर्मा ने बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षक-अभिभावक संवाद को अनिवार्य बताया। पढ़िए, बच्चों को सुरक्षित माहौल देने की इस महत्वपूर्ण पहल की पूरी रिपोर्ट।

जयपुर। बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए जयपुर स्थित एमपीएस इंटरनेशनल स्कूल में 'पॉक्सो (POCSO) एक्ट' के विभिन्न पहलुओं पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण सत्र का मुख्य ध्येय शिक्षकों को कानूनी प्रावधानों और बच्चों के व्यवहारिक बदलावों के प्रति प्रशिक्षित करना था, ताकि विद्यालय परिसर में एक अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार किया जा सके।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित एडवोकेट राधिका माहेश्वरी और नीतिका कलाकार ने कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण से विषय की गंभीरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि 'सेक्सुअल एब्यूज' (यौन शोषण) और 'साइबर बुलिंग' जैसे संवेदनशील विषयों पर अध्यापकों और अभिभावकों को बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना चाहिए। वक्ताओं ने कार्यशाला के दौरान पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत आने वाले सभी संवैधानिक प्रावधानों की विस्तृत व्याख्या की। साथ ही, उन्होंने शिक्षकों को आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर्स, बच्चों के व्यवहार में आने वाले सूक्ष्म बदलावों की पहचान करने के तरीके और कानूनी डॉक्यूमेंटेशन की बारीकियों से भी अवगत कराया।
विद्यालय के सचिव राधामोहन कचोलिया और भवन मंत्री गोविंद मालपानी ने सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों को सही अवधारणाओं और नैतिक मूल्यों से परिचित करवाना केवल विद्यालय का ही नहीं, बल्कि अभिभावकों का भी साझा उत्तरदायित्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब घर और स्कूल एक ही धरातल पर सोचेंगे, तभी बच्चों का सर्वांगीण विकास सुरक्षित वातावरण में संभव हो पाएगा।
सत्र के समापन पर प्राचार्या मंजू शर्मा ने अपने उद्बोधन में विश्वास दिलाया कि एमपीएस इंटरनेशनल विद्यार्थियों के लिए एक मैत्रीपूर्ण और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि विद्यालय का लक्ष्य एक ऐसा परिवेश प्रदान करना है जहाँ हर बच्चा बिना किसी भय के अपने मन की बात साझा कर सके और स्वयं को पूर्णतः सुरक्षित महसूस करे। यह कार्यशाला न केवल कानूनी जानकारी का माध्यम बनी, बल्कि इसने समाज में बच्चों की सुरक्षा के प्रति एक नई चेतना का संचार भी किया।

