वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर से राजस्थान को नई रफ्तार, उद्योग और व्यापार को मिलेगा वैश्विक विस्तार
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का कार्य पूर्ण होने से राजस्थान के उद्योगों को वैश्विक बाजार और बंदरगाहों तक तेज व किफायती परिवहन कनेक्टिविटी मिलेगी।

राजस्थान में औद्योगिक विकास और माल परिवहन के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के पूर्ण होने के साथ ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती देगी, बल्कि रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास के नए अवसर भी पैदा करेगी।
जवाहर लाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (जेएनपीटी) से दादरी तक फैला 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लगभग 1 लाख 24 हजार करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। इस कॉरिडोर का करीब 39 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरता है, जिससे प्रदेश को देश के उत्तरी और पश्चिमी बाजारों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। हाल ही में जेएनपीटी से न्यू सफाले (वेतरणा) सेक्शन पर सफल ट्रायल रन के साथ इस परियोजना का कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि कई हिस्सों में माल परिवहन पहले से संचालित हो रहा है।
राजस्थान के सीकर, रींगस, फुलेरा, ब्यावर और सिरोही जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से गुजरने वाला यह कॉरिडोर स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसी दिशा में अजमेर के सराधना में गतिशक्ति मल्टी मॉडल कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन किया गया है। आधुनिक कार्गो हैंडलिंग सुविधाओं, वेयरहाउसिंग और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी से लैस यह टर्मिनल प्रतिवर्ष लगभग 1.5 मिलियन टन कार्गो हैंडल करने में सक्षम होगा। इससे किशनगढ़ के मार्बल, ग्रेनाइट, खनिज और अन्य उत्पादों को जेएनपीटी, पीपावाव और मुंद्रा बंदरगाहों तक तेज और किफायती परिवहन सुविधा मिलेगी।
डब्ल्यूडीएफसी की एक प्रमुख विशेषता रेल-पर-ट्रक (टीओटी) सेवा है, जिसके माध्यम से माल से लदे ट्रकों को विशेष फ्लैट वैगनों पर रेल नेटवर्क के जरिए लंबी दूरी तक पहुंचाया जाता है। यह व्यवस्था राजमार्गों पर दबाव कम करने, डीजल की खपत घटाने और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाने में मददगार साबित होगी। साथ ही सड़क अवसंरचना पर पड़ने वाले भार में भी कमी आएगी।
यह सुविधा किसानों और उद्यमियों के लिए भी लाभदायक मानी जा रही है। उदाहरण के तौर पर सीकर का प्याज कम समय में दूरस्थ उपभोक्ता बाजारों तक पहुंच सकेगा, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों को लाभ मिलेगा।
तकनीकी दृष्टि से भी यह कॉरिडोर पारंपरिक रेल मार्गों की तुलना में अधिक सक्षम है। इसकी ऊंचाई 7.1 मीटर तथा चौड़ाई 3,660 मिमी रखी गई है। 1,500 मीटर लंबी मालगाड़ियां यहां संचालित की जा सकेंगी, जबकि सामान्य रेल कॉरिडोर में यह क्षमता लगभग 700 मीटर तक सीमित रहती है। इसके अलावा डबल कंटेनर स्टैकिंग और अधिक भार वहन क्षमता जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। मालगाड़ियों की औसत गति को 25 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़ाकर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक किया गया है, जिससे परिवहन समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
उल्लेखनीय है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के तहत पश्चिमी कॉरिडोर दादरी से जेएनपीटी और पूर्वी कॉरिडोर लुधियाना से डंकुनी तक विकसित किया गया है। देश के लगभग 70 प्रतिशत माल परिवहन को सुगम बनाने के उद्देश्य से तैयार इस परियोजना के दोनों ओर 150 किलोमीटर का प्रभाव क्षेत्र दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत राजस्थान में खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र तथा जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र को भी नई औद्योगिक पहचान मिलने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि राजस्थान के औद्योगिक, व्यापारिक और आर्थिक भविष्य को नई दिशा देने वाला विकास का मजबूत आधार बनकर उभर रहा है। इससे प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने का मार्ग और अधिक सुगम होगा तथा ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ की अवधारणा को वास्तविक मजबूती मिलेगी।

Pratahkal Bureau
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