राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में व्यास पूजा समारोह, 150 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया भाग
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय और खंडाच के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में व्यास पूजा समारोह आयोजित हुआ। 150 से अधिक छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, शिक्षकों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।

तस्वीर में श्री भंवरलाल रतनलाल पाटनी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, खंडाच के प्रांगण में व्यास पूजा समारोह के दौरान मंचासीन अतिथियों और नीचे बैठे छात्र-छात्राओं का समूह नजर आ रहा है।
भारतीय शिक्षण मंडल (चित्तौड़ प्रांत) की राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय इकाई और श्री भंवरलाल रतनलाल पाटनी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, खंडाच के संयुक्त तत्त्वावधान में व्यास पूजा समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और सनातन ज्ञान पद्धति को पुनर्जागृत करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ आत्मीय, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। फार्मेसी विभाग, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर एवं अनुसंधान गतिविधि के सह-प्रमुख त्र्यंबक बसाक ने ध्येय श्लोक का वाचन किया। इसके बाद बी.एससी. कार्डियोलॉजी, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र एवं संपर्क कार्य विभाग टोली के सदस्य ज्ञान कुमार ने ध्येय वाक्य प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथियों एवं आयोजकों ने भारत माता और विद्या की देवी माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम की औपचारिक प्रस्तावना और मंचासीन अतिथियों के परिचय के बाद राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में सहायक-आचार्य एवं भारतीय शिक्षण मंडल, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष डॉ. ज्ञान रंजन पांडा ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की प्राचीन जड़ों को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को गढ़ने वाली एक अविरल धारा है।
मुख्य वक्ता डॉ. जय प्रकाश त्रिपाठी, सहायक आचार्य, गणित विभाग, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं प्रांत सह-मंत्री, भारतीय शिक्षण मंडल, चित्तौड़ प्रांत ने आदिगुरु भगवान शिव से लेकर महर्षि वेद व्यास तक की महान ज्ञान परंपरा का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि महर्षि व्यास ने भारतीय चिंतन, वेदों के वर्गीकरण और पुराणों की रचना के माध्यम से सभ्यता को दिशा दी। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ अपने नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी जीवन में अपनाएं।
समारोह के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री अजीत वाकलीवाल जी ने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन और विचारों पर आधारित प्रेरणादायक गीत की संगीतमय प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में रुशम दास, रिसर्च स्कॉलर, फार्मेसी विभाग, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं सह-प्रमुख, युवा गतिविधि ने आगत अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। इसके बाद वैदिक ‘कल्याण मंत्र’ ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के पाठ के साथ समारोह के समापन की घोषणा की गई।
व्यास पूजा समारोह में लगभग 150 से अधिक छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, विद्यालय के शिक्षकों तथा गणमान्य नागरिकों ने उत्साह और अनुशासन के साथ भाग लिया। आयोजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और सनातन ज्ञान पद्धति के प्रति विद्यार्थियों और शोधार्थियों के जुड़ाव को रेखांकित किया गया।

Pratahkal Newsroom
प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
