विलायती बबूल उन्मूलन के लिए राजस्थान में बनेगी चरणबद्ध कार्ययोजना
पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर की अध्यक्षता में हुई बैठक; स्थानीय जैव विविधता बचाने के लिए लकड़ी से कोयला बनाने का बनेगा प्रभावी ऑक्शन प्लान।

जयपुर स्थित शासन सचिवालय के पंचायती राज सभागार में विलायती बबूल (जूलिफ्लोरा) के उन्मूलन को लेकर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा करते पंचायती राज मंत्री श्री मदन दिलावर (बाएं से चौथे), वन मंत्री श्री संजय शर्मा (बाएं से तीसरे) और पंचायती राज राज्य मंत्री श्री ओटाराम देवासी (बाएं से पांचवें)।
प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है। राज्य में विलायती बबूल (जूलिफ्लोरा) के संपूर्ण उन्मूलन को लेकर आज शासन सचिवालय स्थित पंचायती राज सभागार में पंचायती राज मंत्री श्री मदन दिलावर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में वन मंत्री श्री संजय शर्मा के साथ पंचायती राज राज्य मंत्री श्री ओटाराम देवासी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए पंचायती राज मंत्री श्री मदन दिलावर ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि वे विभिन्न विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर विलायती बबूल के उन्मूलन के लिए एक प्रभावी और चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करें। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि स्थानीय वनस्पति प्रजातियों का संरक्षण सुनिश्चित करने और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती प्रदान करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया जाना अत्यंत आवश्यक है। मंत्री ने इसके लिए जरूरी दिशा-निर्देश तैयार करने तथा विलायती बबूल की लकड़ी से कोयला बनाने के उद्देश्य से एक प्रभावी ऑक्शन प्लान (नीलामी योजना) बनाने के भी निर्देश दिए।
राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए श्री मदन दिलावर ने विलायती बबूल से होने वाले नुकसानों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि विलायती बबूल एक ऐसी बाहरी प्रजाति है जो अन्य किसी भी स्थानीय वनस्पति को पनपने नहीं देती है। इसकी जड़ें भूमि में 10 मीटर गहराई तक फैल जाती हैं, जिसके कारण यह अत्यधिक मात्रा में पानी सोखता है। ऐसी हानिकारक बाहरी प्रजातियों के कारण ही प्रदेश की स्थानीय जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंच रहा है, जिसके स्थायी समाधान के लिए अब विभागीय समन्वय के साथ यह महाअभियान धरातल पर उतारा जाएगा।
इस दौरान वन मंत्री श्री संजय शर्मा ने अभियान के कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि विलायती बबूल की लकड़ी से बने कोयले के परिवहन में आने वाली टीपी (परिवहन अनुमति) की समस्या का समाधान उपलब्ध है। इसके लिए भारत सरकार का एनजीटी (NGT) पोर्टल कार्यरत है, जिसके माध्यम से ऑनलाइन टीपी जारी की जाती है।
इस उच्च स्तरीय बैठक में हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स श्री अरिजीत बनर्जी, शासन सचिव एवं आयुक्त (पंचायती राज) डॉ. जोगाराम सहित राजस्व विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अधिकारियों ने इस अभियान की संपूर्ण कार्ययोजना, तकनीकी पहलुओं और क्षेत्रवार रणनीति को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। इस अभियान के सफल क्रियान्वयन से न केवल राजस्थान के भूजल और स्थानीय वनस्पतियों का संरक्षण होगा, बल्कि पर्यावरण पारिस्थितिकी तंत्र को एक नया जीवन मिलेगा।

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