प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गरीब कल्याण के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए, देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' का सूत्रपात हो रहा है। आगामी 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होने जा रहे इस अधिनियम के माध्यम से ग्रामीण भारत में रोजगार की एक नई परिभाषा लिखी जाएगी, जो मनरेगा का स्थान लेगी। राजस्थान के लिए यह मिशन एक बड़ी सौगात लेकर आया है, जहाँ प्रदेश की ग्रामीण जनता के सशक्तिकरण हेतु 11 हजार 581 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट आवंटित किया गया है।

केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस मिशन के तहत 95 हजार 692 करोड़ रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है, जो अब तक की सबसे बड़ी आवंटन राशि है। राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में बात करें, तो केंद्र से प्राप्त 7 हजार 581 करोड़ रुपये के अंतरिम बजट में राज्य सरकार अपने स्तर से 4 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़ेगी। यह कुल 11 हजार 581 करोड़ रुपये की भारी-भरकम पूंजी न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का सृजन करेगी, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने में भी मील का पत्थर साबित होगी।

इस नई व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया गया है। अब ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार का वैधानिक अधिकार प्राप्त होगा, जो पहले 100 दिनों तक सीमित था। श्रमिकों को बड़ी राहत देते हुए भुगतान की अवधि को 15 दिनों से घटाकर साप्ताहिक कर दिया गया है। यह संपूर्ण भुगतान डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक या डाकघर खातों में हस्तांतरित होगा, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। अधिनियम में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय में रोजगार नहीं मिलता है, तो बेरोजगारी भत्ता और भुगतान में देरी होने पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान भी सुनिश्चित किया गया है।

यह अधिनियम केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न विभागों के संसाधनों के तालमेल से ग्रामीण आधारभूत ढांचे के निर्माण में गुणवत्ता भी सुनिश्चित करेगा। ई-केवाईसी पूर्ण कर चुके मौजूदा जॉब कार्ड धारकों के लिए यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी जब तक कि उन्हें नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। मुख्यमंत्री के कुशल मार्गदर्शन में राज्य सरकार इस मिशन को पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करने के लिए तैयार है, ताकि राजस्थान का कोई भी पात्र परिवार इस विकास यात्रा से वंचित न रहे। यह बदलाव ग्रामीण भारत की आजीविका सुरक्षा और आय में वृद्धि के साथ-साथ एक समावेशी विकसित भारत के निर्माण की दिशा में उठाया गया सबसे ठोस कदम है।

Pratahkal Newsroom

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