सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कैंसर से बचे लोगों का दिवस अटूट आशा और मानवीय साहस का उत्सव है। उन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए भगवान महावीर कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र और केजी कोठारी मेमोरियल ट्रस्ट की सराहना की तथा वर्ष 1997 में स्थापना के बाद से कैंसर क्षेत्र में अस्पताल की अनुकरणीय सेवा को स्वीकार किया, जिसने अपने समर्पित और करुणामय उपचार के माध्यम से अनगिनत लोगों के जीवन को छुआ है।

भारत में कैंसर के बढ़ते बोझ पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईसीएमआर के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुसार देश में प्रतिवर्ष 15 लाख से अधिक कैंसर के मामले सामने आते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने रोकथाम, शीघ्र निदान, उपचार और रोगी देखभाल के उद्देश्य से कई पहलें शुरू की हैं।

उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 68 लाख से अधिक कैंसर उपचार उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें से लगभग 75 प्रतिशत लाभार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। यह योजना स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि केंद्र सरकार देश भर के जिला अस्पतालों में डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित कर रही है, जिनमें से 450 से अधिक सेंटर पहले से ही कार्यरत हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत शुरू की गई पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्रारंभिक जांच और जिला एवं उप-मंडल अस्पतालों में कैंसर रोधी दवाओं को आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल करना शामिल है।

निवारक स्वास्थ्य देखभाल के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से निपटने के लिए इस वर्ष की शुरुआत में शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम का उल्लेख किया, जिसका लक्ष्य एक करोड़ से अधिक लड़कियों को कवर करना है। उन्होंने इस पहल को आगे बढ़ाने में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राजस्थान सरकार के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने देशभर के कैंसर उपचार संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय और साझा ज्ञान की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि कैंसर देखभाल में नवीनतम तकनीकी प्रगति को सभी सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में प्रभावी ढंग से साझा किया जाना चाहिए, ताकि बेहतर परिणाम सुनिश्चित हो सकें और गुणवत्तापूर्ण उपचार तक व्यापक पहुंच हो सके। उन्होंने कहा कि संस्थानों के बीच अधिक सहयोग और समझ से कैंसर के खिलाफ राष्ट्र की लड़ाई को काफी मजबूती मिलेगी।

उपराष्ट्रपति ने धूम्रपान, तंबाकू सेवन, नशीली दवाओं के उपयोग और अस्वास्थ्यकर फास्ट फूड की आदतों के हानिकारक प्रभावों के प्रति निरंतर जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि जीवनशैली में बदलाव कैंसर के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कैंसर से बचे लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने उन्हें “योद्धा” बताया, जिन्होंने असाधारण दृढ़ता और साहस का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी कहानियां दूसरों के लिए आशा की किरण हैं और डॉक्टरों व देखभाल करने वालों की अथक सेवा और करुणा के लिए आभार व्यक्त किया।

उन्होंने अस्पताल के व्यापक प्रयासों की सराहना की, जिनमें स्क्रीनिंग अभियान, मोबाइल मेडिकल यूनिट और नुक्कड़ नाटक, शैक्षिक व्याख्यान व सामुदायिक शिविर जैसे जागरूकता अभियान शामिल हैं, जिन्होंने शीघ्र निदान और जीवन बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उपराष्ट्रपति ने जागरूकता बढ़ाने, शीघ्र निदान को प्रोत्साहित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया कि कोई भी कैंसर से अकेले न लड़े। उन्होंने लोगों से कैंसर से बचे लोगों की कहानियों से प्रेरणा लेने का आग्रह किया और ऐसे समाज के निर्माण पर जोर दिया जहां आशा, भय पर विजय प्राप्त करे।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कैंसर से बचे लोगों को सम्मानित भी किया और इस बीमारी पर विजय पाने में उनके साहस और दृढ़ता की सराहना की। कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसानराव बागडे, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेंद्र सिंह खिमसर और भगवान महावीर कैंसर अस्पताल के अध्यक्ष श्री नवरतन कोठारी सहित अन्य विशिष्ट अ

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