जयपुर के अल्बर्ट हॉल में गूंजा 'वन्दे मातरम्', राष्ट्रगीत के 150वें वर्ष के गौरव में डूबी गुलाबी नगरी
जयपुर के अल्बर्ट हॉल में राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा भव्य आयोजन किया गया। निबंध प्रतियोगिता, देशभक्ति लघु फिल्म और पुलिस बैंड की गूंज के साथ मनाया गया "स्वतंत्रता का मंत्र-वन्देमातरम"। इस ऐतिहासिक समाचार के माध्यम से जानें राजस्थान में कैसे मनाया जा रहा है आत्मनिर्भर भारत का संकल्प।

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक अल्बर्ट हॉल के प्रांगण में शुक्रवार को राष्ट्रभक्ति का एक ऐसा ज्वार उमड़ा जिसने हर हृदय को 'वन्दे मातरम्' के अमर उद्घोष से सराबोर कर दिया। राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के इस ऐतिहासिक पड़ाव को प्रदेशभर में उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। "स्वतंत्रता का मंत्र-वन्देमातरम" और "समृद्धि का मंत्र-आत्म निर्भर भारत" की इसी गौरवशाली थीम पर आधारित कार्यक्रमों की श्रृंखला ने जयपुरवासियों को गौरव के क्षणों से भर दिया। यह भव्य आयोजन राजस्थान सरकार के कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के सौजन्य से किया गया, जो राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक माध्यम बना।
इस भव्य समारोह की रूपरेखा चार चरणों में तैयार की गई है, जिसके तहत वर्तमान में द्वितीय चरण (19 जनवरी से 26 जनवरी 2026) के कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। शुक्रवार को राजकीय केन्द्रीय संग्रहालय, अल्बर्ट हॉल में आयोजित गतिविधियों में युवा पीढ़ी का उत्साह देखते ही बनता था। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण निबन्ध लेखन प्रतियोगिता रही, जहाँ युवाओं ने अपनी लेखनी के माध्यम से वन्दे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व और स्वाधीनता संग्राम में इसकी भूमिका को रेखांकित किया। इसके साथ ही, वन्दे मातरम् पर आधारित एक विशेष लघु चलचित्र (Short Film) का प्रदर्शन भी किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को उन संघर्षों और बलिदानों की याद दिला दी जो इस गीत की रचना की पृष्ठभूमि में रहे हैं।
सांस्कृतिक वैभव और राजकीय सम्मान के सामंजस्य के बीच, राजस्थान पुलिस बैण्ड की देशभक्ति पूर्ण प्रस्तुति ने पूरे परिसर को जोश से भर दिया। पुलिस बैण्ड द्वारा दी गई धुनें जब फिजाओं में गूंजी, तो वहां मौजूद हर नागरिक के रोंगटे खड़े हो गए। कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल राष्ट्रगीत का सम्मान करना है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी जन-जन तक पहुंचाना है। यह आयोजन एक सरकारी औपचारिकता मात्र न रहकर एक जन-आंदोलन की छवि पेश कर रहा है, जो आने वाली 26 जनवरी तक अपनी पूरी आभा के साथ जारी रहेगा। यह समारोह न केवल इतिहास को जीवंत करने का प्रयास है, बल्कि आधुनिक भारत की समृद्धि और एकता का एक सशक्त दस्तावेज भी है।

Pratahkal Bureau
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