वंदे गंगा अभियान: जयपुर में 200 से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का लोकार्पण
मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतिभा वर्मा के नेतृत्व में जयपुर जिले की ग्राम पंचायतों में जल स्वावलंबन के तहत 430 से अधिक नवीन कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए गए।

जयपुर जिले की ग्राम पंचायत दांतला मीणा में आयोजित जल चौपाल के दौरान 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' का बैनर थामे ग्रामीण और अधिकारीगण। इस अभियान का उद्देश्य भूजल संवर्धन और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित कर क्षेत्र को जल संकट से मुक्त बनाना है।
राजस्थान की धरा पर जल संकट के स्थाई समाधान और भूजल संवर्धन के लिए शुरू किया गया "वंदे-गंगा" जल संरक्षण जन अभियान 2026 अब एक विराट जन आंदोलन का रूप ले चुका है। जयपुर जिले के विभिन्न ब्लॉकों में जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा नोडल विभाग के रूप में इस अभियान के तहत व्यापक स्तर पर जल संरक्षण एवं जनजागरूकता गतिविधियों का शंखनाद किया गया है। जिले के दूदू, मौजमाबाद, फागी, सांभर, किशन रेनवाल, तुंगा, शाहपुरा, आमेर, जालसू, गोविन्दगढ़, चाकसू, जोबनेर तथा माधोराजपुरा सहित अन्य ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में धरातल पर जल सहेजने की ऐतिहासिक मुहिम चलाई जा रही है, जो आने वाले समय में क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली साबित होगी।
इस महा-अभियान की प्रशासनिक कमान संभाल रहीं जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतिभा वर्मा ने बताया कि अभियान के अंतर्गत मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (एमजेएसए) 2.1 एवं 2.2 के तहत जिले के विभिन्न ग्राम पंचायत क्षेत्रों में निर्मित जल संरक्षण संरचनाओं का गहन अवलोकन और लोकार्पण किया गया। जल आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे इन कार्यों के तहत फार्म पॉण्ड, सनकेन पॉण्ड, रिचार्ज शाफ्ट, वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं, चेकडैम एवं अन्य जल संरक्षण कार्यों सहित लगभग 200 से अधिक पूर्ण हो चुके ढांचागत कार्यों का मौके पर निरीक्षण कर उन्हें जनता को समर्पित किया गया है।
भविष्य की तैयारियों को और अधिक मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.2 एवं 2.3 के अंतर्गत विभिन्न ब्लॉकों से प्राप्त लगभग 430 से अधिक नवीन जल संरक्षण कार्यों के विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर उच्च स्तर पर स्वीकृति हेतु अग्रेषित कर दिए गए हैं। इन दूरगामी प्रस्तावों में मुख्य रूप से फार्म पॉण्ड, सनकेन पॉण्ड, रिचार्ज संरचनाएं, चारागाह विकास, जल संचयन तथा भूजल पुनर्भरण से संबंधित अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य सम्मिलित किए गए हैं, जो क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र को नया जीवन देंगे।
पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण को बढ़ाने के लिए इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों में पारंपरिक ओरण एवं चारागाह भूमि का वैज्ञानिक पद्धति से चिन्हीकरण किया गया है। इन चयनित स्थलों पर आधुनिक मियावाकी पद्धति से सघन पौधारोपण एवं घास बुवाई की अग्रिम तैयारियां युद्धस्तर पर प्रारम्भ कर दी गई हैं। इसी कड़ी में 'हरियालो राजस्थान अभियान' के अंतर्गत दांतला मीणा, किशन रेनवाल, मौजमाबाद, दूदू एवं अन्य ग्राम पंचायतों में लगभग 41 हजार से अधिक पौधों के रोपण की मुकम्मल तैयारी की गई है, जिसके तहत सैकड़ों गड्डों की खुदाई का कार्य पूरा कर पौधारोपण स्थलों का अंतिम रूप से चयन कर लिया गया है।
कृषि और वानिकी को बढ़ावा देने के लिए मौजमाबाद क्षेत्र में विशेष 'बीज बैंक' गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिससे स्थानीय कृषकों एवं ग्रामीणों को सीधे तौर पर लाभान्वित कर उन्हें आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया गया। इसके साथ ही, चारागाह विकास एवं प्राकृतिक संसाधन संरक्षण को धरातल पर उतारने के लिए अनेक रणनीतिक स्थानों पर चारागाहों का चयन एवं सीमांकन करने की विधिक प्रक्रिया पूरी की गई।
जनभागीदारी को इस पूरे अभियान की रीढ़ बनाते हुए दांतला मीणा, अकोड़ा, श्योसिंहपुरा, अनंतपुरा, रामसिंहपुरा, नयाबास, अचरोल, सिरसली, कुशलपुरा, तमड़िया, झरना, देवला, जड़ावता, मोरड़ा, कुड़ियों का बास, हसुलिया तथा मेहंदवास सहित दर्जनों ग्राम पंचायतों में जीवंत 'जल चौपालों' का आयोजन किया गया। इन जल चौपालों में लगभग एक हजार से अधिक ग्रामीणों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और जल संरक्षण, भूजल संवर्धन, वर्षा जल संचयन एवं अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक संरक्षण पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के अंत में समस्त ग्रामीणों ने जल संरक्षण को एक पावन जन आंदोलन बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा संचालित इन बहुआयामी गतिविधियों के माध्यम से संपूर्ण जयपुर जिले में जल संरक्षण, भूजल संवर्धन, हरित आवरण वृद्धि और अटूट जनभागीदारी का एक ऐसा अभूतपूर्व और चेतनायुक्त वातावरण निर्मित हो चुका है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की ठोस गारंटी बनेगा।

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