जयपुर, 14 मार्च।

“अनहद” संगीत श्रृंखला की सातवीं कड़ी में शनिवार शाम राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर का मुख्य सभागार सरोद के मधुर और आत्मीय सुरों से गुंजायमान हो उठा। पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकार, स्पिकमैके और राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में पद्मविभूषण सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान ने कई वर्षों बाद जयपुर में प्रस्तुति देकर संगीत प्रेमियों को एक यादगार संगीतमय अनुभव प्रदान किया।

उस्ताद अमजद अली खान ने अत्यंत श्रृंगारिक और आत्मीय शैली में राग श्यामा गौरी की प्रस्तुति दी। इस राग की शुरुआत उन्होंने गुरु वंदना से कर राग का विस्तार किया। उनके सरोद से निकलते मधुर स्वरों ने सभागार में एकाग्रता और भावनात्मक गहराई का वातावरण रच दिया। उनकी प्रस्तुति में परंपरा की गंभीरता और सहज अभिव्यक्ति का अद्भुत संतुलन देखने को मिला।

कार्यक्रम के दौरान सरोद और तबले के बीच हुआ सवाल-जवाब भी श्रोताओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। तबले पर रोहन बोस और जुहेब खान की सशक्त संगत ने इस संगीतमय संवाद को और रोचक बना दिया। लय और स्वर के इस जीवंत संवाद पर सभागार बार-बार तालियों से गूंजता रहा।

प्रस्तुति के दौरान उस्ताद अमजद अली खान ने श्रोताओं से संवाद करते हुए कहा कि आज की दुनिया बहुत तेजी से भाग रही है और लोगों के पास समय का अभाव है। ऐसे में कलाकारों को भी समय की इस सीमा को समझते हुए अपनी प्रस्तुतियों को उसी अनुरूप ढालना होगा। उन्होंने कहा कि संगीत ईश्वर की उपासना का सबसे सशक्त माध्यम है और बच्चों को शब्दों से पहले संगीत की सरगम का ज्ञान दिया जाना चाहिए, ताकि उनमें संवेदना और सौंदर्यबोध का विकास हो सके।

उस्ताद अमजद अली खान ने सरोद के जरिए जो स्वरलहरियां निकालीं, वे गीत बनकर श्रोताओं को मोहित करती रहीं। प्रस्तुतियों के बीच उनका संवाद भी चलता रहा, जिसमें उन्होंने श्रोताओं को सितार और सरोद वादन के अंतर को समझाया। उस्ताद अमजद अली खान ने सरोद के माध्यम से “वैष्णव जन तो... पीर पराई जाने रे...” सहित अमीर खुसरो की कव्वाली भी सुनाई, जिसने सभागार में विशेष भावनात्मक वातावरण निर्मित कर दिया।

उस्ताद अमजद अली खान ने कहा कि वे दस साल बाद जयपुर में अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जब भी बुलाया जाएगा, वे अपने पूरे परिवार के साथ यहां प्रस्तुति देने के लिए अवश्य आएंगे। कार्यक्रम के समापन पर उस्ताद ने गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर की ख्यातिनाम रचना “एकला चालो रे...” सरोद पर प्रस्तुत कर जयपुर के श्रोताओं को एक भावपूर्ण संगीतमय विदाई दी, जिसने इस संध्या को यादगार बना दिया।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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