जयपुर में यूपीईएस ने AI-फर्स्ट शिक्षा मॉडल और 2026-27 प्रवेश किए घोषित
जयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान यूपीईएस विश्वविद्यालय ने अपने 'एआई-फर्स्ट विश्वविद्यालय' बनने की रूपरेखा साझा की और नए सत्र के पाठ्यक्रमों में एआई के 33 प्रतिशत एकीकरण की जानकारी दी।

जयपुर में यूपीईएस को 'एआई-फर्स्ट यूनिवर्सिटी' के रूप में पेश करने और आगामी शैक्षणिक सत्र के कार्यक्रमों की घोषणा के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस की मेज पर बैठे डॉ. संजय मल्ला, डॉ. अभिषेक सिन्हा और नवनीत विभव।
जयपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान भारत के अग्रणी बहुविषयक एवं शोध-आधारित शिक्षण संस्थानों में से एक UPES ने स्वयं को ‘एआई-फर्स्ट विश्वविद्यालय’ के रूप में विकसित करने की अपनी विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय ने ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टुमॉरो’ के विज़न को साझा करते हुए बताया कि उसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उद्योग सहयोग और शोध-आधारित शिक्षण के माध्यम से छात्रों को भविष्य की कार्य दुनिया के लिए तैयार करना है। साथ ही शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बहुविषयक कार्यक्रमों में प्रवेश आमंत्रित किए गए।
कार्यक्रम में बताया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑटोमेशन के बढ़ते प्रभाव के बीच वैश्विक रोजगार परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार वर्ष 2030 तक जहां बड़ी संख्या में पारंपरिक भूमिकाएँ प्रभावित होंगी, वहीं लगभग 17 करोड़ नई नौकरियों के अवसर भी सृजित होंगे। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए यूपीईएस ने अपने पाठ्यक्रमों में एआई दक्षता, विश्लेषणात्मक सोच और समस्या-समाधान क्षमताओं को केंद्र में रखा है।
विश्वविद्यालय ने OpenAI के साथ अपने सहयोग के तहत 19,100 से अधिक छात्रों और 1,500 फैकल्टी सदस्यों को उन्नत एआई टूल्स तक नियंत्रित एवं निःशुल्क पहुँच उपलब्ध कराने की जानकारी दी। साथ ही सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों में 33 प्रतिशत तक एआई एकीकरण और प्रत्येक छात्र के लिए एआई ट्यूटर की सुविधा को लागू किया जा रहा है, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक व्यक्तिगत और तकनीक-संचालित बन सके।
कार्यक्रम में राजस्थान के स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी उल्लेख किया गया, जहां 5,200 से अधिक DPIIT-पंजीकृत और 6,000 से अधिक आई-स्टार्ट स्टार्टअप्स सक्रिय हैं। इस पृष्ठभूमि में यूपीईएस ने IBM, Infosys, Bajaj Auto, HP, Bosch, HCL Technologies, Cisco, Tata Power तथा Larsen & Toubro जैसी कंपनियों के साथ उद्योग सहयोग को अपने शिक्षण मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग के तहत University of California, Berkeley, University of Glasgow, University of Edinburgh और University of New South Wales जैसे वैश्विक संस्थानों के साथ साझेदारी का उल्लेख किया। इसके साथ ही ‘स्कूल फॉर लाइफ’, ‘डिज़ाइन योर ओन डिग्री’, ‘सृजन’, ‘डैबल’ और ‘नेस्ट’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों के समग्र विकास और नवाचार क्षमता को बढ़ावा देने की जानकारी दी गई।
शैक्षणिक ढांचे के अंतर्गत स्कूल ऑफ लॉ में एआई, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स जैसे नए क्षेत्रों को शामिल किया गया है, वहीं स्कूल ऑफ बिजनेस में एआई फॉर बिजनेस, फिनटेक और डेटा एनालिटिक्स जैसे विषयों पर फोकस किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों को क्रमशः एनआईआरएफ 2025 में लॉ में 18वां और मैनेजमेंट में 36वां स्थान प्राप्त हुआ है। वहीं विश्वविद्यालय को एनआईआरएफ यूनिवर्सिटी श्रेणी में 45वां स्थान मिला है तथा QS World University Rankings के अनुसार भारत में निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक प्रतिष्ठा के आधार पर पहला स्थान प्राप्त हुआ है।
इसके अलावा बताया गया कि विश्वविद्यालय में 50 से अधिक फैकल्टी सदस्य Stanford University की सूची के अनुसार दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत शोधकर्ताओं में शामिल हैं। प्लेसमेंट के क्षेत्र में लगभग 800 रिक्रूटर्स ने भागीदारी की और उच्चतम पैकेज 54 लाख रुपये प्रतिवर्ष दर्ज किया गया, जो इसके उद्योग-संरेखित शिक्षा मॉडल को और मजबूत करता है।
यह पहल स्पष्ट करती है कि यूपीईएस अपने एआई-फर्स्ट दृष्टिकोण के माध्यम से शिक्षा को केवल अकादमिक दायरे से आगे ले जाकर सीधे भविष्य की उद्योग आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

Pratahkal Bureau
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