केंद्रीय बजट 2026-27: विकसित भारत के लिए राज्यों को 1.04 लाख करोड़ का प्रावधान
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने बजट को समावेशी बताते हुए निकायों के लिए अनुदान और कर विकेंद्रीकरण में राज्यों की 41 प्रतिशत हिस्सेदारी की सराहना की।

जयपुर में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने केंद्रीय बजट 2026-27 में नगरीय एवं ग्रामीण निकायों के लिए किए गए वित्तीय प्रावधानों की जानकारी दी।
विकसित भारत का संकल्प और ऐतिहासिक घोषणाएं
जयपुर, 01 फरवरी। राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि "केंद्रीय बजट 2026-27 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को तेजी से साकार करने में कारगर साबित होगा। इस बजट के केंद्र में आमजन है, जिनके सर्वांगीण कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक घोषणाएं की गई हैं।"
सर्वस्पर्शी और समावेशी बजट
चतुर्वेदी ने कहा कि बजट को सर्वस्पर्शी और समावेशी बनाया गया है। इसमें निम्नलिखित वर्गों के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं:
- युवा और महिला
- किसान और गरीब
- नौकरीपेशा और व्यापारी
उन्होंने कहा कि आज हमारा देश विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। इसी दिशा में केंद्रीय बजट में कुशल वित्तीय प्रबंधन की मूल भावना के अनुरूप कई घोषणाएं की गई हैं। इससे आर्थिक सुधारों को अपेक्षित गति मिलेगी।
निकायों के लिए 1.04 लाख करोड़ का प्रावधान
वित्त आयोग अध्यक्ष ने कहा कि बजट में 16वें वित्त आयोग की सिफारिश के अनुरूप वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को 1 लाख 4 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें शामिल हैं:
- ग्रामीण निकाय अनुदान
- शहरी स्थायी निकाय अनुदान
- आपदा प्रबंधन अनुदान
इस प्रकार यह बजट राजस्थान सहित सभी राज्यों के पंचायत एवं शहरी निकायों में अधिक से अधिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त करता है।
कर विकेन्द्रीकरण और राज्यों की हिस्सेदारी
उन्होंने कहा कि "केन्द्र सरकार ने राज्यों के लिए कर विकेन्द्रीयकरण में 41 प्रतिशत की हिस्सेदारी को स्वीकार कर लिया गया है।"
इस प्रकार 2026-27 के बजट में राज्यों के लिए कर विकेन्द्रीयकरण जीडीपी का 3.9 प्रतिशत बताया गया है जो कि वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 1.33 लाख करोड़ रुपये अधिक है।

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