उदयपुरवाटी के 17 श्रद्धालुओं का जत्था सकुशल चारधाम यात्रा पूरी कर लौटा
राजस्थान के उदयपुरवाटी से गए 17 सदस्यों के जत्थे ने 13 दिनों में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर वापसी की।

उदयपुरवाटी से आए 17 सदस्यीय जत्थे का स्थानीय लोगों द्वारा स्वागत करते हुए, जिन्होंने 13 दिनों में चारधाम यात्रा संपन्न की है।
उदयपुरवाटी। धार्मिक आस्था, दृढ़ संकल्प और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को पार करते हुए उदयपुरवाटी कस्बे का 17 सदस्यीय श्रद्धालु जत्था 13 दिवसीय चारधाम यात्रा सकुशल संपन्न कर वापस लौट आया है। भगवान केदारनाथ और बद्री विशाल के जयकारों के साथ जैसे ही श्रद्धालुओं ने कस्बे में प्रवेश किया, परिजनों और स्थानीय लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर व मिठाई खिलाकर उनका भावपूर्ण स्वागत किया। अपनों को सकुशल एवं प्रफुल्लित देखकर परिजनों की आंखें खुशी से छलक उठीं। इस जत्थे में ललित कुमार सोनी, रेणु सोनी, विराट सोनी, प्रणव सोनी, संदीप कुमार सोनी, रेणु सोनी, भव्य सोनी, महिमा सोनी, ओम प्रकाश शर्मा, कांता शर्मा, विकास योगी, प्रियंका योगी, रमाकांत मित्तल, ममता, अरविन्द स्वामी, सुनीता और सुधांशु स्वामी सहित कुल 17 सदस्य शामिल थे।
यात्रा का अनुभव साझा करते हुए श्रद्धालुओं ने बताया कि यह सफर अत्यंत चुनौतीपूर्ण और रोमांचक रहा। जत्थे ने 20 मई को उदयपुरवाटी से प्रस्थान किया और सर्वप्रथम हरिद्वार पहुंचकर गंगा आरती का दिव्य लाभ लिया। इसके पश्चात 21 मई को गंगा स्नान कर जत्था बरकोट के लिए रवाना हुआ। यात्रा के दौरान 22 मई को हनुमान चट्टी और जानकी चट्टी होते हुए यमुनोत्री धाम के लिए करीब 7 किलोमीटर की खड़ी और दुर्गम चढ़ाई शुरू की। इस दौरान क्षेत्र में तेज बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के हौसले नहीं डिगे और वे भीगते हुए मां यमुनोत्री के दर्शन हेतु पहुंचे।
उत्तरकाशी के मल्ला गांव में रात्रि विश्राम के बाद 24 मई को जत्था मां गंगोत्री धाम पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं ने मां गंगा के उद्गम स्थल के दर्शन किए। 25 मई को यात्रा जारी रखते हुए जत्थे ने तिलवाड़ा में पड़ाव डाला और 26 मई को केदारनाथ के बेस कैंप सीतापुर पहुंचे। यात्रा के सबसे कठिन पड़ाव के रूप में 27 मई को तड़के बाबा केदारनाथ की करीब 18 किलोमीटर लंबी और दुर्गम चढ़ाई घोड़ों के माध्यम से पूर्ण की गई। बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने के उपरांत जत्थे ने मंदिर के समीप स्थित धर्मशाला में रात्रि विश्राम किया। 28 मई को वापसी करते हुए श्रद्धालु गौरीकुंड और सोनप्रयाग होते हुए शाम तक सीतापुर लौटे।
यात्रा का अंतिम चरण बद्रीनाथ धाम के साथ पूर्ण हुआ। 29 मई को बद्रीनाथ के लिए प्रस्थान करने के बाद लंबी दूरी के कारण रात्रि विश्राम पीपलकोटी में किया गया। 30 मई को दोपहर में जत्था भू-वैकुंठ श्री बद्रीनाथ धाम पहुंचा। इस वर्ष चारों धामों में भारी भीड़ के कारण श्रद्धालुओं को दर्शन हेतु करीब 4 घंटे तक कतार में इंतजार करना पड़ा, किंतु भगवान बद्री विशाल के दर्शन मात्र से ही सारी थकान मिट गई।
यात्रा की पूर्णाहुति 31 मई को देवप्रयाग संगम पर अलकनंदा और भागीरथी के मिलन के साक्षी बनकर और सिद्धपीठ मां धारी देवी मंदिर में दर्शन के साथ हुई। दोपहर में ऋषिकेश पहुंचकर लक्ष्मण झूला और राम झूला देखने के पश्चात 1 जून को हरिद्वार में पुनः गंगा स्नान किया गया और देर रात सभी सदस्य सकुशल उदयपुरवाटी लौट आए। श्रद्धालुओं ने बताया कि केदारनाथ धाम में प्रशासन की दर्शन व्यवस्था अत्यंत सुचारू थी। यात्रा के दौरान हुई कठिनाइयों के बावजूद बाबा केदार और बद्रीनाथ के दर्शन से प्राप्त सकारात्मक ऊर्जा ने सभी को अभिभूत कर दिया। श्रद्धालुओं ने एकमत होकर कहा कि यदि बाबा का बुलावा फिर आया, तो वे पुनः इस पवित्र यात्रा पर अवश्य जाएंगे।

