उदयपुरवाटी उपखंड क्षेत्र के छापोली गांव में हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से आठ श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। हादसे के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर वर्षों से झूलती हाईटेंशन लाइन की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार, छापोली गांव में कदम कुंड तक जाने के लिए जन सहयोग से सीसी रोड बनाने का कार्य चल रहा था। इसी दौरान सीसी रोड निर्माण में इस्तेमाल की जा रही मशीन हाईटेंशन लाइन में उलझ गई। इसके कारण करंट की चपेट में आने से आठ लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में पांच श्रमिक घायल हुए हैं। इनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्हें उदयपुरवाटी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। घायलों की हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है।

हादसे की सूचना मिलते ही सीआई रामपाल मीणा के निर्देशन में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।

मृतकों की पहचान हालेड़ा तन मंडावरा निवासी हरिराम (30), मंगल चंद (22) पुत्र गिरधारी लाल गुर्जर, कालूराम (29) पुत्र भींवाराम गुर्जर और पवन (23) पुत्र जगदीश प्रसाद गुर्जर के रूप में हुई है। वहीं, मोतीयाला तन छापोली निवासी सुरेंद्र उर्फ सुरेश (30) पुत्र महावीर सैनी, मुकेश (21) पुत्र शंकर लाल सैनी, फतेहचंद (32) पुत्र जगदीश प्रसाद सैनी और ठेकेदार विष्णु (38) पुत्र नाथूराम सैनी की भी हादसे में मौत हुई है।

घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से झूलती हुई हाईटेंशन लाइन को हटाने की मांग कर रहे थे। इस संबंध में बड़े हादसे की आशंका को लेकर चेतावनी भी दी जा रही थी, लेकिन अब वही आशंका भयावह हादसे में बदल गई।

घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों और लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी दिखाई दी। उनका कहना था कि प्रशासन की अनदेखी के कारण इतना बड़ा हादसा हुआ है। ग्रामीणों ने श्रमिकों के आश्रितों के हितों की रक्षा और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता जताई।

अब पूरे मामले में प्रशासन के अगले निर्णय पर ग्रामीणों की नजर है। हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के आश्रितों के हितों और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के प्रयासों को लेकर प्रशासन को गंभीरता से फैसला लेना होगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उचित कदम नहीं उठाए गए तो उन्हें आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ सकता है।

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