उदयपुर पुलिस का बड़ा एक्शन: 874 ठिकानों पर दबिश, 298 अपराधी गिरफ्तार
उदयपुर पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन में 460 पुलिसकर्मियों की 111 टीमों ने अपराधियों के खिलाफ जिलेभर में एक साथ विशेष अभियान चलाया।

उदयपुर की फिजाओं में रविवार की अलसुबह एक अनूठा सन्नाटा था, जिसे चीरती हुई पुलिस की 111 गाड़ियों का काफिला जिले के अलग-अलग कोनों की ओर कूच कर गया। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के नेतृत्व में उदयपुर पुलिस ने अपराधियों के नेटवर्क पर अब तक का सबसे बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए एक साथ 874 ठिकानों को घेरे में लिया। यह कार्रवाई केवल एक छापेमारी नहीं, बल्कि संगठित अपराध और बदमाशों के हौसलों को पस्त करने के लिए चलाया गया एक सुनियोजित 'ऑपरेशन क्लीन' था, जिसने जिलेभर में हड़कंप मचा दिया।
इस व्यापक अभियान को अंजाम देने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा और अंजना सुखवाल की देखरेख में 460 से अधिक पुलिसकर्मियों की 111 विशेष टीमों का गठन किया गया था। भोर होने से पहले ही पुलिस की इन टीमों ने जिले के चप्पे-चप्पे पर दबिश देना शुरू कर दिया। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य एरिया डोमिनेंस स्थापित करना और लंबे समय से पुलिस की पकड़ से दूर चल रहे वांछित अपराधियों को कानून के दायरे में लाना था।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने हत्या, लूट, डकैती, एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामलों में वांछित 12 शातिर अभियुक्तों को दबोचा। वहीं, कानून की प्रक्रिया को गति देते हुए 77 स्थायी वारंटियों और 12 गिरफ्तारी वारंटों का निस्तारण कर कुल 89 वारंटियों को सलाखों के पीछे भेजा गया। इसके अतिरिक्त, सामान्य प्रकरणों में वांछित 8 अन्य अभियुक्तों को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आदतन अपराधियों पर भी नकेल कसते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धाराओं 129, 170 एवं 172 के तहत 186 व्यक्तियों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की। जिले के 73 हिस्ट्रीशीटरों के ठिकानों पर भी पुलिस पहुंची और उनसे कड़ी पूछताछ की गई।
अवैध गतिविधियों के विरुद्ध भी पुलिस का शिकंजा पूरी तरह कसा रहा। छापेमारी के दौरान आबकारी अधिनियम के 16, आर्म्स एक्ट का एक और जुआ अधिनियम के तीन प्रकरण दर्ज कर कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने इस सफलता को अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी जीत बताते हुए स्पष्ट किया कि जिले को अपराध मुक्त बनाने के लिए भविष्य में भी इसी प्रकार के अभियान निरंतर जारी रहेंगे। उन्होंने आम नागरिकों से निडर होकर अपराधियों की सूचना देने का आह्वान किया और भरोसा दिलाया कि मुखबिर की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। यह महा-अभियान न केवल अपराधियों में भय पैदा करने वाला रहा, बल्कि आमजन के बीच कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास को और अधिक सुदृढ़ कर गया।

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