उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में बुधवार को ज्ञान और संकल्प का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जब भूपाल नोबल्स (बीएन) विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में भविष्य के कर्णधारों को उपाधियाँ वितरित की गईं। इस गरिमामयी अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए शिक्षा को समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान का सबसे सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीबी के अंधकार को मिटाने के लिए शिक्षा से बढ़कर कोई दूसरा प्रकाश पुंज नहीं है।

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने संस्थान के ऐतिहासिक सफर को रेखांकित किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिस बीएन संस्थान की नींव मेवाड़ के प्रेरणापुरुष महाराणा भूपाल सिंह ने एक साधारण पाठशाला के रूप में रखी थी, वह आज अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता के कारण देशभर में एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित हो चुका है। राज्यपाल ने महाराणा भूपाल सिंह की दूरदृष्टि को नमन करते हुए वर्ष 1945 का स्मरण किया, जब उन्होंने राजमहल के भीतर औषधालय स्थापित कर जनसेवा की अनूठी मिसाल पेश की थी।

मेवाड़ की शौर्यगाथा को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ते हुए राज्यपाल ने बप्पा रावल के अदम्य साहस का जिक्र किया, जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं को देश की सीमाओं से बाहर खदेड़ दिया था। उन्होंने कहा कि मेवाड़ के शासकों ने सदैव स्वयं को भगवान एकलिंगजी का दीवान मानकर शासन किया है, और यही सेवा भाव आज की शिक्षा प्रणाली का आधार होना चाहिए। जनजातीय बहुल इस क्षेत्र में बीएन संस्थान की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने आह्वान किया कि आदिवासी और वंचित वर्ग को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना राष्ट्र निर्माण के लिए अपरिहार्य है।

दीक्षांत समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में राज्यपाल ने अपनी मेधा का परिचय देने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के 90 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई, जबकि 47 मेधावी विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक से नवाजा गया। कुल 2025 विद्यार्थियों को विभिन्न संकायों की डिग्रियां प्रदान कर उनके सुनहरे भविष्य की मंगलकामना की गई।

राज्यपाल ने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना ही अंतिम पड़ाव नहीं है, बल्कि निरंतर सीखने की जिद ही व्यक्ति को महान बनाती है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि बीते एक दशक में 25 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा से बाहर आना सुशासन का प्रमाण है। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर संकेत करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे तक्षशिला और नालंदा के प्राचीन गौरव को पुनः स्थापित करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ें। यह समारोह केवल उपाधि वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में संपन्न हुआ।

Pratahkal Newsroom

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