सभ्यता के शिल्पियों को समर्पित भारत का पहला सार्वजनिक स्मारक उदयपुर में होगा तैयार
उदयपुर के जे.के. सर्किल पर बनने जा रहा भारत का पहला आर्किटेक्ट्स टॉवर। महान सूत्रधार मंडन को समर्पित इस स्मारक में क्या है खास? साइंस, संस्कृति और आधुनिक आर्किटेक्चर के इस अनूठे संगम और भव्य टॉवर की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

उदयपुर के जे.के. सर्किल पर निर्माणाधीन आर्किटेक्ट्स टॉवर और उसके परिसर की प्रस्तावित डिजाइन। यह तस्वीर काल्पनिक है और एआई द्वारा केवल संदर्भ के लिए बनाई गई है।
उदयपुर में सभ्यताओं की पहचान रहे शिल्पियों और आर्किटेक्ट्स को सम्मानित करने के लिए देश का पहला सार्वजनिक स्मारक आकार ले रहा है। झीलों की नगरी उदयपुर के शोभागपुरा स्थित जे.के. सर्किल पर लगभग 35 फीट ऊँचा आर्किटेक्ट्स टॉवर बनाया जा रहा है, जो भारतीय आर्किटेक्चर, शिल्प और रचनात्मक परंपरा को समर्पित होगा। यह टॉवर न केवल एक संरचना है, बल्कि उन महान क्रिएटिव माइंड्स के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक है जिन्होंने नगरों, दुर्गों और मंदिरों को आकार दिया। प्रोजेक्ट डायरेक्टर एवं आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा के अनुसार इस कार्य का शुभारंभ 7 जुलाई से किया जाएगा और इसे जल्द ही आमजन को समर्पित कर दिया जाएगा।
भारतीय शिल्प परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम सूत्रधार माना गया है और इसी सूत्रधार परंपरा को इस स्मारक के माध्यम से रेखांकित किया जाएगा। यह विरासत पंद्रहवीं शताब्दी के मेवाड़ के महान सूत्रधार मंडन को समर्पित होगी, जिन्होंने महाराणा कुंभा के मुख्य आर्किटेक्ट के रूप में कुंभलगढ़ दुर्ग और चित्तौड़गढ़ के अनेक महलों एवं मंदिरों का निर्माण किया। मंडन ने प्रासादमंडन, राजवल्लभ, रूपमंडन और वास्तुमंडन जैसे कालजयी ग्रंथों की रचना की, जो आज भी भारत और विदेशों में आर्किटेक्चर स्टडी के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ हैं।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की संकल्पना उदयपुर के आर्किटेक्ट सुनील लड्ढा ने की है। उनका मानना है कि दुनिया भर में स्मारक अक्सर शासकों या ऐतिहासिक घटनाओं की स्मृति में बनते हैं, लेकिन इन स्मारकों की कल्पना करने वाले आर्किटेक्ट्स के लिए सार्वजनिक स्थान दुर्लभ हैं। तकनीकी सहयोगी युवा आर्किटेक्ट प्रियंका कोठारी ने बताया कि इस टॉवर की प्रमुख विशेषता इसमें स्थापित होने वाला वर्टिकल सन डायल यानी ऊर्ध्वाधर सूर्य घड़ी होगी। यह आधुनिक आर्किटेक्चर और भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ प्रकृति, समय और विज्ञान के संबंध को प्रदर्शित करेगा।
यह टॉवर पर्यटकों, इंजीनियर्स, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए एक शैक्षिक लैंडमार्क और आकर्षण का केंद्र बनेगा। दिन में अपनी विशिष्ट बनावट और रात में आकर्षक लाइटिंग से सराबोर यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि सभ्यताओं का वास्तविक निर्माण दूरदर्शी आर्किटेक्ट्स और उनके क्रिएटिव मस्तिष्क से होता है। विश्व आर्किटेक्चर जगत में उदयपुर की इस पहल को एक नई पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

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